जलियांवाला बाग हत्याकांड की 100वीं बरसी आज, पीएम मोदी ने ट्वीट कर अर्पित की श्रद्धांजलि

नई दिल्ली। देश में स्वतंत्रता संग्राम की लड़ाई में आज का दिन एक काला इतिहास बनकर दर्ज है। जलियांवाला बाग नरसंहार की आज 100वीं बरसी है। आज ही के दिन ठीक 100 साल पहले 13 अप्रैल 1917 को जलियांवाला बाग में एक शांतिपूर्ण सभा में जमा हुए हजारों भारतीयों पर अंग्रेज हुक्मरानों ने अंधाधुंध गोलियां बरसाई थीं। घटना के 100 साल बाद भी गोलियों के निशान आज भी जलियांवाला बाग की दीवारों पर मौजूद हैं, जो भारतीयों पर हुए ब्रिटिश शासन के अत्याचार की कहानी बयां कर रहे हैं।

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जलियांवाला बाग के 100वीं बरसी पर ट्वीट करते हुए श्रद्धांजलि दी है। उन्होंने ट्वीट में लिखा “मैं उन शहीदों को नमन करता हूं, जिनकी आज के दिन जलियांवाला बाग में नृशंस हत्या की गई थी। हम उनके साहस और बलिदान को कभी नहीं भूलेंगे। उनकी वीरता आने वाले कई वर्षों तक भारतीयों को प्रेरित करती रहेगी।”

100 साल पहले क्या हुआ था?

दरअसल, इस दिन आजाद भारत का सपना देखने वाले हजारों लोग अमृतसर के जलियांवाला बाग में एक बैठक करने को इकट्ठे हुए थे। इस बात की भनक फिरंगी शासकों को लग गई और उन्होंने भारतीय लोगों को सबक सिखाने की सोची। इसके बाद जनरल डायर के नेतृत्व में सैकड़ों अंग्रेज सिपाहियों ने इस पार्क को चारों ओर से घेर लिया। इस पार्क से बाहर निकलने के लिए एक संकरा सा रास्ता था इसे भी अंग्रेज सिपाहियों ने बंद कर दिया था।

ताबड़तोड़ फायरिंग में हजारो निहत्थे भारतीय हुए थे शहीद

इस बैठक में मौजूद भारतीय लोग जबतक कुछ समझ पाते उससे पहले ही जनरल डायर ने आवाज लगाई फायर और फिर निर्दोष, निहत्थे भारतीय लोगों पर गोलियों की बरसात कर दी गई। गोलियों की बौछार से पार्क में अफरातफरी मच गई। लोग जान बचाने के लिए हर तरफ भागने लगे। इसी सिलसिले में सैकड़ों लोग कुंए में कूद गए। कुंए में कूदने से उनकी जान तो नहीं बची, लेकिन वो फिरंगियों की गोली से शहीद नहीं हुए। इस नरसंहार में ब्रिटिश सरकार की एक रिपोर्ट के मुताबिक 379 लोग मारे गए थे जबकि 1200 से अधिक लोग घायल हुए थे।

घर में घुसकर मारी जनरल डायर को गोली

इस घटना की देश सहित पूरी दुनिया में आलोचना हुई। दुनिया के सामने ब्रिटिश सरकार का काला चेहरा बेनकाब हुआ। घटना के बाद रवीन्द्रनाथ टैगोर ने अपनी ‘नाइटहुड’ की उपाधि ब्रिटिश सरकार को वापस कर दी। बाद में इस घटना का बदला भी एक भारतीय ने लिया। उधम सिंह नाम के एक वीर भारतीय ने लंदन में जाकर इस नरसंहार के आरोपी जनरल डायर की हत्या गोली मारकर कर दी।

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