पाकिस्तान के मौलवियों की इमरान खान को चेतावनी, धार्मिक आयोजनों पर न लगाए प्रतिबंध

नई दिल्ली। दुनिया में इस समय कोरोना का कहर अपने चरम पर है। जिससे बचने के लिए तमाम मुल्कों में लाॅकडाउन लागू है। सभी उद्योग – धंधे , कारोबार बंद हैं, मंदिरों , गिरजाघरों को भी बंद कर दिया गया है। लोगों से अपील की जा रही है बहुत ज्यादा जरूरी होने तक घर से बाहर न निकले। ऐसा ही हमारे पड़ोसी देश पाकिस्तान में भी है। लेकिन पाकिस्तान के लिए कोरोना की चुनौती से निपटना थोड़ा मुश्किल हो सकता है। इकोनोमिक्स टाइम्स में छपी खबर के मुताबिक पाकिस्तान में 50 से अधिक वरिष्ठ मौलवियों के एक समूह ने कोरोनोवायरस प्रकोप के दौरान धार्मिक मण्डलों पर प्रतिबंध के खिलाफ इमरान खान के नेतृत्व वाली सरकार को कड़ी चेतावनी दी है।

पाकिस्तान सरकार ने  कोरोनोवायरस को रोकने के उपायों के तहत पांच से अधिक लोगों की प्रार्थना सभाओं पर प्रतिबंध लगा दिया था। जिसका मौलवियों ने विरोध किया है। मौलवियों का कहना है कि अधिकारियों को धार्मिक मानदंडों का पालन करना चाहिए और मस्जिदों में नमाजियों को जाने देना चाहिए, जिससे वह अल्लाह से क्षमा मांग सके।

डॉन की रिपोर्ट के मुताबिक, सोशल डिस्टेंसिंग के नियमों का पालन न करते हुए रावलपिंडी व इस्लामाबाद के 50 से अधिक मौलवियों ने सोमवार को जामिया दारुल उलूम जाकरिया में मुलाकात कर इस विषय पर चर्चा की है। इनका मानना है कि मस्जिदों में अल्लाह से माफी मांगने के लिए लोगों को इजाजत मिलनी चाहिए।

बैठक में जमीयत-ए-उलेमा इस्लाम, जमीयत-ए-उलेमा पाकिस्तान, जमात-ए-इस्लामी और तन्ज़ीम-ए-इस्लामी नाड के प्रतिनिधि कई अन्य धार्मिक दलों ने भी भाग लिया था।

वहीं इस्लामाबाद में जामिया दारुल उलूम ज़कारिया के अध्यक्ष पीर अज़ीज़ुर रहमान हज़ारवी ने कहा, “मस्जिदों को बंद करना, शुक्रवार की नमाज और तरावीह बंद करना देशवासियों के लिए अस्वीकार्य है।”

बैठक में सामूहिक प्रार्थनाओं के लिए मस्जिदों के भीतर अधिकतम पांच व्यक्तियों के आधिकारिक निर्देशों को भी स्वीकार नहीं किया गया है।

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने मंगलवार को राष्ट्रीय बंद के 14 दिनों के विस्तार की घोषणा की थी। हालांकि, उन्होंने कहा था कि सरकार बढ़ती बेरोजगारी को कम करने के लिए आवश्यक उद्योगों को चलाने की छूट देगी।

पाकिस्तान में हालात पहले ही बेहाल है,पाक की शीर्ष भी इमरान सरकार को महामारी से निपटने के सरकार के प्रयासों को लेकर फटकार लगा चुकी है। यहां तक कि अदालत ने कोविड-19 के प्रकोप से निपटने में विफल रहने के लिए प्रधानमंत्री के विशेष स्वास्थ्य सहायक डॉ जफर मिर्ज़ा को हटाने का निर्देश दे दिया था। अब इन मौलवियों ने सरकार के सामने और चुनौती पेश कर दी है। देखना यह है कि इमरान नियाजी इन मौलवियों से  निपटते कैसे हैं।

पाकिस्तान में कोरोना के ताजा आकड़ों की बात करें तो, worldometer.org के मुताबिक पाक में इस समय 6505 कोरोना से संक्रमित मरीज हैं। वहीं कोरोना से मरने वालों की संख्या 124 हो चुकी है।

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