CAA, NRC का सर्वे करने आए हैं, अफवाह के चलते लोगों ने स्वास्थ्यटीम को कोरोना की जांच से कर दिया था इंकार

नई दिल्ली। राजस्थान भी कोरोना से प्रभावित होने वाले देश के मुख्य राज्यों में से है। यहां कोरोना संक्रमितों की संख्या का आकड़ा हजार पार कर चुका है। राजस्थान के लगभग सभी जिले कोरोना की चपेट में आ चुके हैं। जयुपर के बाद जोधपुर में कोरोना के सबसे ज्यादा मामले हैं। कोरोना से देश को बचाने के लिए डॅाक्टर दिन रात एक कर रहे हैं, लेकिन फिर देश में कोरोना की जांच करने वाली मेडिकल टीम पर कई हमले हो चुके हैं, बुधवार को ही उत्तरप्रदेश के मुरादाबाद और बिहार में डॅाक्टरों की टीम पर हमले की घटना हुई है। कोरोना से जांच में डॅाक्टरों का सहयोग न करने वाले लोग न केवल खुद की बल्कि अन्य लोगों की जान भी खतरे में डाल रहे हैं।

बावजूद इसके डॅाक्टर अपनी पूरी जिम्मेवारी निभा रहे हैं। जोधपुर में ही नागौरी गेट और उदयमदिंर के आसन के घनी आबादी वाले क्षेत्र में कोरोना की जांच का जिम्मा कुछ महिला डाॅक्टरों को सौंपा गया था। जब यह महिला डॅाक्टर इन इलाकों में जांच करने जाती थी, तो इन्हें यह कह कर जांच में सहयोग नहीं करते थे कि आप सीएए और एनआरसी का सर्वे करने आए हो। लेकिन इन हालातों में भी महिला डॅाक्टरों ने हिम्मत नहीं हारी। चिकित्सा कर्मियों ने सीएए और एनआरसी को लेकर इनके मन में बैठै डर को दुर कर इनका विश्वास और भरोसा हासिल किया। जिसके बाद मेडिकल कैंप लगाकर इन लोगों के सैंपल लेने शुरू किए। नतीजा यह हुआ कि अब इस इलाके में लगातार पाॅजिटिव केस सामने आ रहे हैं।  महिला मेडिकल स्टाॅफ के इस कार्य के लिए जिला कलेक्टर प्रकाश राजपुरोहित द्वारा सम्मानित भी किया गया है।

दैनिक भास्कर ने इन महिला चिकित्सा कर्मियों के साथ अपना अनुभव साझा किया है।दैनिक भास्कर से बात करते हुए  डॉ. हिना आफताब ने बताया कि उन्हें किस प्रकार की दिक्कते आई थी और फिर उन्होंने उन दिक्कतों का पार किया। वो बताती हैं , मुझे 31 मार्च को नागौरी गेट भेजा गया था। मैंने यहां जॉइन करते ही सर्वे की रणनीति तैयार की। यहां आने के बाद से ही लग रहा था कि इन मुश्किल हालात में कैसे काम कर पाऊंगी। मैं मेडिकल टीम का नेतृत्व कर रही थी। अपनी टीम के साथ में जब इलाके में पहुंची तो असली चुनौती से सामना हुआ। ये इलाका मेरे लिए नया और अनजाना था। यहां की गलियों से मैं वाकिफ भी नहीं थीं। दैनिक भास्कर से बात करते हुए हिना आगे बताती हैं, जहां नगमा रहती थी, वहां से सर्वे शुरू किया तो लोग सहयोग की बजाय, हमें जाने को मजबूर कर रहे थे। उनके पास मोबाइल में अफवाहों वाले मैसेज आने के कारण वे भ्रमित थे। वे एकसाथ मुझसे कहते कि आप लोग एनआरसी और सीएए का सर्वे करने आए हों। वे समझ रहे थे, हम उनके लिए खतरा बने हुए हैं और उन्हें यहां से ले जाएंगे। वे हमारे से सवाल करते कि हमें उठाकर ले जाकर बंद करोगे क्या? गलत अफवाह के कारण डरे हुए थे। ऐसे में टेस्ट करवाना दूर की बात है, सर्वे के फाॅर्म में जो जानकारी पूछ रहे थे, उसका भी जवाब नहीं दे रहे थे।  ऐसी स्थिति में कुछ समझ नहीं आ रहा था क्या किया जाए। हमें पहले दिन यहां कोई सफलता हासिल नहीं हुई।
आगे हिना बताती हैं, अगले दिन मैंने दो स्थानीय लोगों को अपने साथ लिया जो उनसे अपनी स्थानी भाषा में बात कर सकते थे और निवासियों को समझा सकते थे, कि वे सर्वेक्षण करने नहीं बल्कि डॅाक्टर हैं जो महामारी से आपकी जान बचाने आएं हैं। इसके बाद हम उन्हें समझाते हुए चले गए। उन्हें हाथ धोने, मास्क लगाने के लिए जागरूक करते रहे। हमारे मोबाइल नंबर दिए और कहा कि कोई मिस गाइड करता है तो तुरंत बताओ। फिर भी टीमों से कहते थे कि हमें मेडिकल सुविधाएं नहीं मिल रही हैं। वे सहयोग की बजाय हमें जाने के लिए कह रहे थे। फिर भी मैंने हार नहीं मानी और टीमों का गठन किया। 36 वार्ड को बीएलओ को बांट दिया। इनके साथ नर्सिंग स्टूडेंट, एएनएम को तैनात किया।

टीम ने खुद को तीन समूहों में विभाजित किया

डाॅ.हिना आगे बताती हैं कि उन्होंने टीम को तीन समूहों में बांटकर ,स्थानीय रहन-सहन के अनुसार निवासियों से संपर्क करना शुरू किया। इससे हमारी बात उनके समझ में आने लगी। हमने उनका विश्वास हासिल करने के लिए भोजन, दवा और उनकी अन्य दैनिक जरूरतों को पूरा करना शुरू कर दिया। इससे उन्हें हम पर विश्वास हो गया। इसके बाद उन्हें कम्युनिटी हॉल में मेडिकल कैंप लगाया, जिसमें काफी भीड़ जुटी। हमने उनकी स्क्रीनिंग शुरू की और संदिग्ध दिखने वाले सभी लोगों के रक्त के नमूने लेने शुरू कर दिए। इसका नतीजा यह हुआ कि नागौरी गेट से प्रत्येक दिन दो और इससे ज्यादा पॉजिटिव केस सामने आने लगे। भास्कर से बात करते हुए आगे हिना बताती हैं, यहां से 30 से ज्यादा केस सामने आने के बाद हम इस एरिया को फिर से फिल्टर कर रहे हैं। यहां तीन बार सर्वे हो चुका है। इस क्षेत्र में एजुकेशन की कमी है, इसके चलते वे सहयोग नहीं करते हैं।
कोरोना संक्रमित अयूब अली को ढूंढा 

दैनिक भास्कर से बात करते हुए उदयमंदिर क्षेत्र की एएनएम शोभा बताती हैं कि, यहां लोकल लोगों के संपर्क में होने के बावजूद उनके लिए यहां काम करना कठिन चुनौती थी। मैंने उस क्षेत्र में रहने वाले लोगों के लहजे में बातचीत और उनके साथ मिक्स होकर उनका विश्वास जीता। उन्हें नहीं लगा कि मैं अलग हूं। यहां के लोगों को प्रभावित करते हुए मैं आशा सहयोगिनी नरगिस के साथ सर्वे के लिए जुटी। यहां की गलियों में घूमते हुए उन्हीं की भाषा में बात की। फिर कुछ लोगों ने मुझे बताया कि हाथीराम का ओडा क्षेत्र में अयूब अली हैं। उन्हें किसी ने अस्पताल आने नहीं दिया है और वे घर पर ही बंद हैं। उन्हें ढूंढने के लिए मैं निकल गईं। वहां गईं तो, काफी लोगों ने बताने से इनकार कर दिया। काफी मशक्कत के बाद आखिर घर का पता मिल गया।हम उनके घर गए और पूछा कि आपको क्या दिक्कत है। वे बाले कि उनके गले में दर्द है। 10 अप्रैल को उनका सैंपल लिया और 12 अप्रैल को उनकी रिपोर्ट पॉजिटिव आई।

कोविड वाली पर्ची ने निमंत्रण पत्र का काम किया

मेडिकल टीम का ही हिस्सा एएनएम हेमलता व्यास दैनिक भास्कर से बात करते हुए बताती हैं,उनके लिए भी इस उदयमंदिर क्षेत्र में काम करना मुश्किल भरा था। सर्वे के लिए जब वे लोगों और महिलाओं से मिलती थीं तो वे दवा मांगते और सहयोग मांगते थे। मैं उन्हें कोविड-19 के सैंपल लेने की पर्ची देकर आती और अपना नंबर पीछे लिखती थीं। वे दोपहर दो बजे बाद कॉल करते तो दवा पहुंचा दी जाती। दवा मिलने के बाद जो भी उस परिवार का संदिग्ध होता, वो सैंपल देने के लिए डिस्पेंसरी चला आता था। कोविड वाली पर्ची हमारे लिए सिर्फ सैंपल लेने का साधन नहीं था, ये उनके लिए निमंत्रण देने जैसा था। इससे वे घर से बाहर निकलते और उन्हें कोई नहीं रोकता। मेरी ये रणनीति इस क्षेत्र में काम आ रही है।

कोरोना से इस लड़ाई में डाॅक्टर अपनी जान की परवाह किए दिन रात मेहनत कर रहे हैं। हम उन पर भरोसा बनाए रखेंगे तो कोरोना के खिलाफ यह जंग जरूर जीत लेंगे। वहीं राजस्थान में कोरोना संक्रमितों के ताजा आकड़ों की बात करें यह संख्या 1107 पहुंच गई है।

rajas

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