आखिर कंगना की बहन रंगोली का गुनाह क्या है?

नई दिल्ली। हिंदुओं को गाली उनकी आस्था का मजाक बनाना, उनके विश्वास पर सवाल खड़े करना मानो सबसे आसान काम है। चाहे जूते चप्पलों पर उनके देवी देवताओं के चित्र बनाना हो या फिर फिल्मों में हिंदू धर्म का मजाक उड़ाना हो। ऐसा करने वालों को सेकुलर, लिबरल और भी न जाने क्या-क्या खिताब दिये जाते हैं कहने की जरूत नहीं। लेकिन जब कोरोना फैलाकर पूरी दुनिया को खतरे में डालने वालों पर कार्रवाई की मांग होती है तो यही सेक्युलर जमात के लोग फुंफकारना शुरू कर देते हैं

आखिर फिल्म अभिनेत्री कंगना रनौत की बहन रंगोली चंदेल का गुनाह क्या था? जब दुनिया में हजारों लोग कोरोना से मर चुके हैं तब इस महामारी को फैलाने वाले क्या आरती उतारे लायक हैं ?

रंगोली चंदेल ने यही तो लिखा था कि “एक जमाती कोरोना से मर गया। जब डॉक्टर्स और नर्स उनके परिवार की जांच करने गये तो उन पर हमला कर दिया। इन मुल्लों और सेक्युलर मीडिया को लाइन में खड़ा करके गोली मार देनी चाहिए। इतिहास की परवाह नहीं करनी चाहिए भले ही वो हमारी तुलना नाजी से करे। फर्जी छवि से ज्यादा जरूरी जीवन है”। इस ट्वीट के खिलाफ फराह खान की शिकायत पर ट्विटर ने रंगोली का अकाउंट निलंबित कर दिया।

गोली मारने का कोई समर्थन नहीं कर सकता और ना ही हिंदुस्तान जैसे लोकतांत्रिक देश में ऐसे संभव है। रंगोली के ये शब्द एक तरह से उस आम आदमी का आक्रोश है जिसके धौर्य की दोहरी परीक्षा ली जा रही है। पहले तो चाइनीज वायरस के कारण लोग घरों में बंद है, काम धंधा ठप पड़ा है, हर कोई चाहता है कि जितना जल्दी हो इस बीमारी से निजात मिले ताकि जिंदगी फिर से पटरी पर लौट सके लेकिन दूसरी तरफ जमाती अपनी हरकतों से पूरे देश में कोरोना के खतरे को और ज्यादा बढ़ाने में लगे हैं कोई डॉक्टरों पर थूक रहा है तो कई अस्पतालों में गंद मचा रहा है जो बाहर बचे हैं उनको मुसलमान घरों में छिपाने का संगीन अपराध कर रहे हैं और जब पता करने जाओ तो लाठी-डंडों ईंट पत्थरों से हमला कर देते हैं।

फर्जी खबरें परोसने वाली मीडिया पर क्यों खामोश है ट्विटर
कोरोना काल में जब ऐसी हरकतों पर रंगोली अपना गुस्सा जाहिर करती हैं तो टुकड़े-टुकड़े गैंग की फराह खान जैसे लोगों को चोट पहुंचती है। फरहा खान की एक शिकायत पर ट्विटर रंगोली का अकाउंट बंद कर देता है लेकिन फेक न्यूज फैलाने वाली मीडिया पर ट्विटर का मौन कई सवाल खड़े करता है।सवाल ये भी है कि जब रंगोली का ट्विटर अकाउंट बंद हो सकता है तो फिर झूठी खबरें परोसने वाले द इंडियन एक्सप्रेस और द वायर जैसे संस्थानों पर ट्विटर मौन है।

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द इंडियन एक्सप्रेस का झूठ
15 अप्रैल 2020, दिन बुधवार को इंडियन एक्प्रेस में एक खबर प्रकाशित हुई जिसमें अहमदाबाद सिविल अस्पताल मेडिकल सुपरिटेंडेंट गुणवंत एच राठौड़ के हवाले से दावा किया गया कि उनके अस्पताल में धर्म व मजहब को देखते हुए मरीजों के लिए अलग-अलग वार्ड बनाए गए हैं। इस झूठी खपर पर डॉक्टरर राठौड़ को सफाई देनी पड़ी जिसमें उन्होंने इंडियन एक्सप्रेस की खबर की रिपोर्ट को झूठी और निराधार बताते हुए इसकी निंदा की । लेकिन इस तरह की झूठी खबर प्रकाशित करने पर भी ट्विटर ने इंडियन एक्सप्रेस का अकाउंट सस्पेंड नहीं किया आखिर क्यों?

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कोरोना काल में सिर्फ इंडियन एक्सप्रेस ने ही झूठ नहीं परोसा बल्कि भदोही की घटना पर भी वामपंथी और टुकड़े टुकड़े गैंग ने बहती गंगा में हाथ धोने की कोशिश की। यहां अप्रैल 12, 2020 की सुबह भदोही में हुई घटना ने पूरे देश को हिला कर रख दिया था। खबर थी एक मां ने अपने 5 बच्चों को गांग नदी में बहा दिया। लेकिन द वायर जैसे मीडिया संस्थान और कुछ पत्रकारों और वकीलों ने इसे भूख से जोड़कर सरकार को घेरने में तनिक देर नहीं लगायी। द वायर से लेकर क्विंट और पुण्य प्रसून वाजपेयी जैसे पत्रकारों ने इस घटना पर खूब झूठ परोसा लेकिन उनका ट्विटर अकाउंट निलंबित नहीं हुआ क्यों ?

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क्या सबा नकवी और सामिया लतीफ का भी अकाउंट बंद होगा ?
ट्विटर अगर रंगोली चंदेल का अकाउंट अगर निलंबित कर सकता है तो फिर TOI की कश्मीरी पत्रकार सामिया लतीफ का भी ट्विटर अकाउंट बंद होना चाहिए जो पीएम मोदी को ट्विटर पर बद दुआएं देती हैं । लेकिन ट्विटर उसका अकाउंट बंद नहीं करेगा क्योंकि वो कथित सेकुलर जमात की जो हैं ? इसी तरह सब नकवी ने जमात वालों के बचाव में एक पुराना वीडियो पोस्ट कर साबित करने की कोशिश की थी कि मंदिरों में लॉक डाउन के बाद भी भीड़ जुट रही है हालांकि जजब पोल खुली तो उन्होंने अपने ट्विटर से वीडियो डिलिट कर दिया लेकिन ट्विटर पर झूठ और नफरत फैलाने वाली सबा नकवी अब भी चहकक रही हैं और जहर फैला रही हैं
हिंसा भड़काने के आरोपी गौतम नवलखा पर मेहरबानी क्यों ?


पुणे के नजदीक भीमा कोरे गांव में 1 जनवरी 2018 को जो हिंसा भड़की थी उसमें गौतम नवलखा का भी नाम शामिल है।सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर गौतम नवलखा को एनआईए के सामने सरेंडर करना पड़ा था। गौतम नवलाखा माओवादियों का अरबन चेहरा रहा है लेकिन इतने संगीन आरोप होने के बावजूद ट्विटर ने गौतम नवलखा को चहकने का पूरा मौका दिया आखिर क्यों

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