गरीबों को नहीं गरीबी को दूर करेगी मोदी सरकार, 1.70 लाख करोड़ के पैकेज में सबके लिए है कुछ न कुछ

नई दिल्ली। कोरोना वायरस के बढ़ते संक्रमण और देश में 21 दिन के लॉकडाउन के बीच मोदी सरकार ने गरीबों के लिए 1.70 लाख करोड़ पैकेज का एलान किया है। कोरोना वायरस से पस्त इकनॉमी को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बूस्टर डोज दिया है। मोदी सरकार 1.70 लाख करोड़ रुपये के इस पैकेज से संकट के इस दौर में समाज के कमजोर तबके की मदद करेगी।

इनमें कुछ महत्वपूर्ण फायदे जो सरकार आम आदमी, गरीब, किसान, और स्वास्थ्य कर्मियों को देगी वो इस प्रकार है।

स्वास्थ्य कर्मी कोरोना महामारी के समय भगवान बनकर सामने आए हैं। सरकार और देश को इस बात का एहसास है। सरकार ने 22 मार्च को पूरे देश को एकजुट किया और प्रधानमंत्री मोदी की एक आवाज पर पूरे देश ने शाम पांच बजे अपने अपने बॉलकोनियों और छतों पर आकर अपने फ्रंटलाइन वॉरियर को धन्यवाद दिया।

कोरोना महामारी से सबसे ज्यादा प्रभावित तबका है देश का गरीब और दिहाड़ीदार तबका। सरकार इस लॉकडाउन की वजह से मुश्किल मे आए 80 करोड़ गरीबों को अगले तीन महीने तक हर माह 5 किलो गेहूं या चावल और पसंद की 1 किलो दालें मुफ्त में मिलेंगी।

इनमें से प्रत्येक व्‍यक्ति को अगले तीन महीनों के दौरान मौजूदा निर्धारित अनाज के मुकाबले दोगुना अन्‍न दिया जाएगा। यह अतिरिक्त अनाज भी पहले मिलने वाले अनाज की तरह ही मुफ्त में मिलेगा।

वित्त मंत्रालय की तरफ से 20 करोड़ महिला जन धन खाता धारकों को अगले तीन महीने तक हर माह 500 रुपये मिलेंगे।

वहीं पीएम गरीब कल्याण योजना के तहत अगले तीन महीनों में 8 करोड़ गरीब परिवारों को गैस सिलेंडर मुफ्त में दिए जाएंगे। इसके अलावा सरकार द्वारा चलाइ जा रही योजना अपनी जगह पर चल ही रहीं हैं।

इनको धन्यवाद देने के अलावा सरकार ने इनको राहत देने के अलावा सरकान ने ‘कोविड-19’ से लड़ने वाले प्रत्‍येक स्वास्थ्य कर्मी को बीमा योजना के तहत 50 लाख रुपये का बीमा कवर प्रदान करने की घोषना की है अर्थात कोविड-19 मरीजों का इलाज करते समय अगर किसी भी स्वास्थ्य प्रोफेशनल के साथ दुर्घटना होती है उन्हें इस योजना के तहत 50 लाख रुपये का मुआवजा दिया जाएगा।

सभी सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों, वेलनेस सेंटरों और केंद्र के साथ-साथ राज्यों के अस्पतालों को भी इस योजना के तहत कवर किया जाएगा, इस महामारी से लड़ने के लिए लगभग 22 लाख स्वास्थ्य कर्मि‍यों को बीमा कवर प्रदान किया जाएगा।

वहीं सरकार ने कोरोना महामारी से सबसे ज्यादा प्रभावित तबका है देश का गरीब और दिहाड़ीदार तबका। सरकार इस लॉकडाउन की बजह से मुश्किल मे आए 80 करोड़ गरीबों को अगले तीन महीने तक हर माह 5 किलो गेहूं या चावल और पसंद की 1 किलो दालें मुफ्त में मिलेंगी।

सरकार के एक अनुमान के अनुसार जिन कंपनियो मे 100 से कम कामगार हैं इनमे विशेषकर प्रति माह 15,000 रुपये से कम पारिश्रमिक पाने वालों को अपना रोजगार खोने का खतरा है। अत: सरकार ने इनको भी सहारा देने का प्रबंध किया है।

इस पैकेज के तहत सरकार ने अगले तीन महीनों के दौरान उनके पीएफ खातों में उनके मासिक पारिश्रमिक का 24 प्रतिशत भुगतान करने का प्रस्ताव किया है जिससे इनके रोजगार में व्यवधान या खतरे को रोका जा सकेगा।

मनरेगा के तहत मजदूरी को 182 रुपये से बढ़ाकर 202 रुपये प्रति दिन कर दिया गया है, 13.62 करोड़ परिवार लाभान्वित होंगे। ऐसी लगभग 3 करोड़ वृद्ध विधवाएं और दिव्यांग श्रेणी के लोग हैं, जो कोविड-19 की वजह से उत्‍पन्‍न हुए आर्थिक व्यवधान के कारण असुरक्षित हैं। सरकार अगले तीन महीनों के दौरान कठिनाइयों से निपटने के लिए उन्हें 1,000 रुपये अतिरिक्त देगी। इनके पैसे सीधे इनके खाते में भेज दी जाएगी।

प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना योजना के तहत सरकार ने कुल आठ कैटेगरी का निर्धारण किया है जिसमें किसान, मनरेगा, गरीब विधवा पेंशनर,दिव्यांग, जनधन योजना, उज्ज्वला स्कीम, सेल्फ हेल्प ग्रुप (विमेन), संगठित क्षेत्र के वर्कर, कंस्ट्रक्शन वर्कर आदि को मोदी सरकार डीबीटी का लाभ देने जा रही है। बुजुर्ग, दिव्यांग और विधवा को एकमुश्त 1000 रुपये दो किस्तों मे दी जाएगी। वहीं भारत की अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाना वाले किसानों, अन्न दाताओं को भी सहारा देने का फैसला किया है।सरकार वर्तमान ‘पीएम किसान योजना’ के तहत अप्रैल के पहले सप्ताह में किसानों के खाते में 2,000 रुपये डालेगी। इस फैसले से 8.7 करोड़ किसान लाभान्वित होंगे ।

‘पीएम गरीब कल्याण योजना’ के तहत 1 अप्रैल, 2020 से मनरेगा मजदूरी में 20 रुपये की बढ़ोतरी की जाएगी। मनरेगा के तहत मजदूरी बढ़ने से प्रत्‍येक श्रमिक को सालाना 2,000 रुपये का अतिरिक्त लाभ होगा। इससे लगभग 62 करोड़ परिवार लाभान्वित होंगे।

लॉकडाउन की वजह से उत्पन्न मंदी और ग्रामीम अर्थव्यवस्था, छोटे और मंझोले उद्योगों को राहत और सहारा देने के उद्देश्य से सरकार ने 63 लाख स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) के माध्यम से संगठित महिलाएं 85 करोड़ परिवारों को आवश्‍यक सहयोग देती हैं। और ए. जमानत (कोलैटरल) मुक्त ऋण देने की सीमा 10 लाख रुपये से बढ़ाकर 20 लाख रुपये की जाएगी ताकि एक बार फिर से कामकाज और उत्पादन को बढ़ाया जा सके और पहले से ही आर्थिक मंदी और मांग की मार झेल रही अर्थव्यवस्था में जान फूंकी जा सके।

जबकि संगठित क्षेत्र के तहत अने वाले कामगार और मध्यम वर्गीय परिवारों में रहने वाले कर्मचारियों के लिए सरकार ने कर्मचारी भविष्य निधि नियमनों में संशोधन कर ‘महामारी’ को भी उन कारणों में शामिल करने का फैसला किया है जिसके तहत कर्मचारियों को अपने खातों से कुल राशि के 75 प्रतिशत का गैर-वापसी योग्य अग्रिम या तीन माह का पारिश्रमिक, इनमें से जो भी कम हो, प्राप्‍त करने की अनुमति दी जाएगी। ईपीएफ के तहत पंजीकृत चार करोड़ कामगारों के परिवार इस सुविधा का लाभ उठा सकते हैं।

EPF

इनके अलावा सरकार का सामने विभिन्न मंत्रालयों द्वारा दी जाने वाली छात्रवृति और अधिछात्रवृति, रबी मौसम की फसलों की कटाई जैसे कई मुद्दे उसके समक्ष हैं और सरकार उन्हें एक – एक कर देख रही है। प्रधानमंत्री ने विभिन्न पहलुओं पर विचार के लिये 10 उच्चाधिकार अधिकारप्राप्त समूहों का गठन किया था। इनमें से एक समूह को आर्थिक उपायों के बारे में सुझाव देने का काम दिया गया था। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में गठित एक अनौपचारिक मंत्री समूह भी लॉकडाउन के विभिन्न पहलुओं पर विचार कर रहा है।

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