हैदराबाद में मदद के नाम पर मुसलमान युवकों की मक्कारी देखिए

नई दिल्ली। पूरा देश कोरोना से लड़ने के लिये लॉक डाउन के दूसरे चरण में है तब इन दिनों मेन स्ट्रीम मीडिया से लेकर सोशल मीडिया पर सामाजिक सौहार्द की गंगा बहायी जा रही है, ये बताया जा रहा है कि हर मुसलमान शेरू मियां नहीं है जो थूक लगाकर हिंदुओं को फल और सब्जी बेचा करता है। और ना ही हर किसी का जमातियों से संबध है जो देशभर में कोरोना बम बनकर घूम रहे हैं । 80 फीसद हिंदू आबादी वाले इस देश में एक मात्र मुसलमान ही हिंदुओं का सच्चा रहबर है। लॉकडाउन के बीच जब किसी अर्थी को कंधा देने की हिम्मत लोग घरों से बाहर नहीं आ रहे हैं तो एक मुसलमान ही हैं जो राम नाम सत्य है बोलते हुए शव यात्रा निकाल रहे हैं और कंधा दे देने से लेकर अग्नि संस्कार तक कर रहे हैं।

अच्छी बात है कि इस देश का मुसलमान जो कभी अयोध्या में वापस मस्जिद बनाने की जिद पर अड़े थे वो आज काफिरों का इतना खयाल रख रहे हैं।राम नाम का जाप करते हुए उनकी अंतिम यात्रा में शामिल हो रहे हैं। लेकिन पहली नजर में आंखों को कुछ सुकून का देने वाली इन खबरों के पार जब नजर जाती है तो सारा फरेब और सारी मक्कारी नजर आ जाती है।असल में इस तरह की खबरें प्लाट करके न सिर्फ झूठी वाही वाही बटोरने की कोशिश हो रही है बलकि मृतक के बल्कि परिवार और रिश्तेदारों की इज्जत की भी टोपी उछाली जा रही है।

गिलीसरीन के आंसू निकालकर अंतिम संस्कार करने वाले मुसलमानों के ऐसे ही एक गैंग का खुलासा हुआ है हैदराबाद में ।जहां इस तरह एक खबर प्लांट की गयी। यहां के खैरताबाद में वेणु मुदराज नाम के एक शख्स की बीमारी के चलते मौत हो गयी थी। वेणु की दो बेटियां हैं और उनकी पत्नी की पहले ही मौत हो चुकी है।लॉक डाउन के बीच जब वेणु मुदराज की अंतिम यात्रा निकाली जा रही थी तो मृतक के जान-पहचान के कुछ स्थानीय मुसलमान भी इसमें शामिल हो गये। इन लोगों ने अर्थी को कंधा दिया। फोटो खिंचवाई और फिर झूठी वाह वाही पाने के लिए हैदराबाद से निकलने वाले स्थानीय अंग्रेजी और तेलगू अखबरों में खबर छपवाने के लिए भेज दी। जिसमें इस बात का जिक्र था कि टीबी के मरीज वेणु की मौत के बाद कोरोना महामारी को देखते हुए कोई भी परिजन अंतिम और पड़ोसी अंतिम संस्कार के लिए नहीं पहुंचा ऐसे में उन लोगों ने वेणु की शव यात्रा निकाली और उनका अंतिम संस्कार कराया साथ ही अनाथ हो चुकी उसकी दो बेटियों की भी मदद की है। अखबारों के संपादकों और रिपोर्टरों ने भी सच्चाई जाने की भी जहमत नहीं उठायी। अगले दिन जब स्थानीय अखबारों में जब कुछ मुसलमान युवकों द्वारा वेणु के अंतिम संस्कार और बेटियों की मदद की खबर प्रकाशित हुई तो वेणु के परिजन स्तब्ध रह गए।

मृतक वेणु के रिश्तेदारों ने जब इन 5 लोगों में से एक शख्स को फोन करके इस तरह की खबर छपवाने का मकसद पूछा तो वो शख्स सकपका गया और माफी मांगने लगा। इतना ही नहीं उसने अगले दिन अखबारों में खबर को लेकर खंडन छापने का भी भरोसा दिलाया।

———मृतक वेणु के परिजन और मुस्लिम युवक के बीच हुई बातचीत का ब्यौरा——–

मृतक का परिजन- हैलो हां कौन हैं साहब आप पेपर डला है मैं नहीं पहचानता।

युवक- नहीं पेपर में ऐसा कुछ बोलके नहीं डलवाया था।

परिजन- पेपर में डाला था अनाथ है कोई भी नहीं है।

युवक- नहीं पेपर में ऐसा कुछ बोल के नहीं डलवाया सर।

परिजन- क्या हेल्प करे आप, कुछ पैसा दिया हमारे को।

युवक- नहीं- नहीं नहीं।

परिजन- नहीं हेल्प क्या करे समझ में नहीं आया मेरे को।

युवक- नहीं साहब हम लोग साथ में आये।

परिजन- आप लोग आकर फोटो उतारा तो वो हेल्प हो गया।

युवक- नहीं नहीं वैसे नहीं फोटो नहीं डला साहब उसके अंदर।

परिजन- फोटो कैसे नहीं डला आंध्रा ज्योति में आया है, कोई भी नहीं बोल के उन लोगों का अरे ऐसा थोड़े ही होता।

युवक- फोटो वोटो कुछ भी नहीं डलवाया हमने माजिद भाई ने डलवाया होगा।

परिजन- नहीं ऐसा कैसा, इंग्लिश पेपर में भी डला है।

युवक- इग्लिश पेपर में एक आध किसी में गलती से हो गया होगा, कुछ फाइनेंसियल बोलकर करके नहीं डलवाया।

दूसरा परिजन- पैसा दिया बोल के डलवाया है।

युवक- नहीं- नहीं ये चीज नहीं है बेटा उसके अंदर।

परिजन- क्या किया आपने कुछ किया हमारे लिये।

युवक- नहीं- नहीं नहीं साहब

परिजन- फिर कैसे डाला?

युवक- सुनो साहब, ह्यूमनिटी के लिए किया। हमारे साथ में उठने बैठने वाले थे ।

परिजन- ठीक है समझ गया।

युवक- एक फ्रैंड्स के हिसाब से हम लोग भी आये, आ कर के चले गये

परिजन- फिर कैसे डाला आप लोगों ने।

युवक- नहीं-नहीं कुछ किया बोल के नहीं डाला साहब।

परिजन- अब इश्यू क्या हो रहा है मालूम वहां पर कि कोई भी नहीं है तुम्हारा। ऐसा कैसे चुप बैठे

युवक- नहीं नहीं ऐसा कुछ भी नहीं डाला हब हम लोग।

परिजन- जो रिपोर्टर है उसने घरवालों से तो पूछना था कि क्या है क्या नहीं है ऐसा कैसे डाला, मरे तो

उस पर पॉलिटिक्स हो गया हमारे को जरूरत भी नहीं कुछ कोई आये आपको पास कुछ दो बोल के।

युवक- अरे नहीं पॉलिटिक्स नहीं है कुछ भी एक अच्छा किया है बोल के।

परिजन- ऐसा कैसे आ गया पेपर में एकदम?

मुसलमान- कुछ भी फाइनेंसियल बोल के नहीं है।

परिजन- हमें क्या हेल्प किया बोले मैं भी पूछ रहा हूं?

मुसलमान- नहीं कुछ भी हैल्प नहीं है थोड़ा मैटर देखिये आप।

परिजन- हम जाकर के हेल्प किया अब क्या हेल्प किया, पूरा मैटर है वो गलत है कहां तक चलेगा तुम्हारे को नहीं मालूम।

मुसलमान- मैं मैटर गलत है पेपर के अंदर आर्टीकल चेंज करवाके डलवा दूंगा।

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  Change )

Google photo

You are commenting using your Google account. Log Out /  Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  Change )

Connecting to %s

Blog at WordPress.com.

Up ↑

%d bloggers like this: