Covid-19 से निपटने में ममता सरकार बुरी तरह असफल – राज्यपाल जगदीप धनखड़

नई दिल्ली। देश में कोरोना का कहर तेजी के साथ आगे बढ़ रहा है। तमाम राज्यों के मुख्यमंत्री व केंद्र सरकार मिलकर इस चुनौती से निपटने का प्रयास कर रहे हैं। लेकिन इस मुश्किल वक्त में भी बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी राजनीति करने के आरोप लग रहे हैं। राज्यपाल जगदीप धनखड़ ने ममता सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा था कि, वे इस वक्त में राजनीति मुनाफा देखने में लगी हुई हैं,जबकि ये समय राजनीति का नहीं है लेकिन ममता बनर्जी राजनीति कर रही हैं। उन्होंने कहा कि राज्य में लॉकडाउन का पालन नहीं हो रहा है। सरकार धार्मिक कार्यक्रमों को रोकने में लगातार असमर्थ दिख रही है। सीएम को इन परिस्थितियों से कई बार अवगत कराया जा चुका है लेकिन सरकार कोई कार्रवाई करने के इच्छुक नहीं दिख रही है। उन्होंने आगे कहा, ‘मैंने राज्य सरकार को कई बार आगाह किया। यह तीसरा विश्व युद्ध है। उन्हें कहा कि यह राजनीतिक रोटियां सेकने का समय नहीं है। मुझे धक्का लगा है राजनीति लोगों को कहां तक ले जा सकती है। राज्यपाल ने सीएम ममता से अपील की कि वे इस संकट की घड़ी में राजनीति करना छोड़ कर केंद्र सरकार के साथ मिलकर काम करें।

वहीं ममता सरकार पर कोरोना संबंधि आकड़ों में हेर फेर का भी आरोप लग रहा है। केंद्र के मुताबिक ममता द्वारा दिए जा रहे राज्य में कोरोना के सही आकड़े नहीं है। तमाम सवालों के बीच केंद्र ने बंगाल में कोरोना वायरस की जांच को लेकर दो टीम भेजी थी, जिसको लेकर भी घमासान मचा था। लेकिन ममता सरकार ने टीम को प्रभावित इलाकों में जाने से रोक दिया था। जिसके बाज राज्यपाल जगदीप धनखड़ ने ट्वीट करते हुए ममता सरकार को कहा था कि, राज्य में आई केन्द्रीय प्रतिनिधि दल को आजारी से घूमने दिया जाए। संविधान को मानकर चलें। उन्होंने कहा कि बातों को आगे न बढ़ाएं। केन्द्रीय प्रतिनिधि दल का सहयोग करें। साथ में मिलकर काम करें।

इसके बाद केंद्रीय गृह सचिव ने राज्य के मुख्य सचिव को कड़ा पत्र लिखकर केंद्रीय टीम को पूरा सहयोग करने का निर्देश दिया।  केंद्र ने यहां तक कहा कि यह आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 के तहत जारी आदेशों का साफ उल्लंघन है और राज्य को सहयोग करना ही होगा। हालांकि इसके बाद राज्य सरकार झुक गई। फिर राज्य के मुख्य सचिव राजीव सिन्हा ने केंद्रीय टीम से मिलकर उन्हें प्रभावित क्षेत्रों का दौरा करने की अनुमति दे दी।

सवालों के बीच घिरी ममता बनर्जी ने भी राज्यपाल धनखड़ पर आरोपों का जवाब देते हुए 5 पन्नों का पत्र लिखा है।अपने इस पत्र में मुख्यमंत्री ने राज्यपाल की ओर से उन्हें पिछले दिनों लिखे गए एक पत्र और एक एसएमएस का हवाला देते हुए उसमें प्रयोग किए गए शब्दों को ‘आपत्तिजनक’ बताया है। उन्होंने राज्यपाल पर आरोप लगाते हुए कहा कि, वह राज्य प्रशासन के कामकाज में लगातार हस्तक्षेप कर रहे हैं। इसके साथ ही बंगाल की सीएम ने राज्यपाल से कहा कि वह फैसला करें कि ‘किसने संवैधानिक धर्म और मर्यादा की सीमा को लांघा है।’

ममता बनर्जी ने कहा कि, धनखड़ भूल गए हैं कि वह (ममता) ‘एक गौरवशाली भारतीय राज्य की निर्वाचित मुख्यमंत्री हैं’, जबकि वह नामित राज्यपाल हैं। उन्होंने लिखा, ‘आपको खुद पर फैसला करना है कि क्या आपने सीधे मुझ पर, मेरे मंत्रियों पर, अधिकारियों पर हमले किए हैं। आपकी भाषा और तेवर को क्या संसदीय कहा जा सकता है, आप जिस राज्य के राज्यपाल हैं वहां की सरकार के खिलाफ प्रेस कॉन्फ्रेंस करना, मेरे मंत्रियों के कामकाज में आपके लगातार हस्तक्षेप से स्पष्ट है कि किसने संवैधानिक धर्म का उल्लंघन किया है।’ बनर्जी ने दावा किया कि राज्यपाल का व्यवहार संवैधानिक पदाधिकारियों के बीच मर्यादा के मूल मानकों के मुताबिक भी नहीं हैं।

ममता बनर्जी के इस पत्र के जवाब में राज्यपाल धनखड़ ने भी तुरंत प्रतिक्रिया देते हुए ट्वीट किया, ‘ममता बनर्जी के कार्यालय से पत्र प्राप्त हुआ, जो तथ्यात्मक रूप से गलत और संवैधानिक रूप से कमजोर है।’

इसके बाद राज्यपाल ने भी एक ट्वीट और किया कहा कि यह शुरुआती जवाब है, अंतिम जवाब कल (शुक्रवार को) दूंगा। लोगों को सबकुछ मालूम होना चाहिए। राज्यपाल ने कहा कि कोई भी कानून के ऊपर नहीं है लोगों को सारी बातें मालूम होनी चाहिए।

अपने तीन पन्नों के पत्र में ममता बनर्जी को जवाब देते हुए राज्यपाल ने लिखा,- हम दोनों संवैधानिक पदाधिकारी हैं। मेरे संबंध में आपके संवैधानिक दायित्वों को संविधान के अनुच्छेद 166 और 167 के तहत स्पष्ट रूप से उल्लिखित किया गया है।

राज्‍यपाल ने मुख्‍यमंत्री ममता की ओर से उन्‍हें केवल मनोनीत अधिकारी बताए जाने पर भी कड़ी प्रतिक्रिया जताई। उन्होंने कहा ममता बनर्जी लगातार राज्‍यपाल के पद को मनोनीत बता उसकी अनदेखी कर संविधान की मूल भावना का अपमान कर रही हैं। देश में आए इस संकट की घड़ी में हमकों पश्‍चिम बंगाल के लोगों के हितों और उनके कल्‍याण के लिए मिलकर काम करना चाहिए, विशेषकर तब, जब हम कोविड 19 जैसी महामारी का सामना कर रहे हैं। राज्‍य का संवेधानिक प्रमुख होने के नाते मैं ये पूरे विश्‍वास के साथ कहना चाहता हूं कि कोविड 19 से निपटने से आप आप पूरी तरह से विफल साबित हुई हैं।

ममता के पत्र के जवाब में धनखड़ ने आगे कहा,  आपकी सरकार के मंत्रियों ने लगातार राज्यपाल के लिए कई बार अपमानजनक भाषा का उपयोग किया है। जिस पर आपकी चुप्पी में आपकी स्वीकृति मालून पड़ती है।

 

ममता बनर्जी और राज्यपाल के बीच हुई तकरार का यह कोई पहला मौका नहीं है इससे पहले भी दोनों के मध्य राज्य में कामकाज को लेकर पहले भी एक दुसरे पर कई बार आरोप-प्रत्यारोप लगाए जाते रहे हैं।

स्वास्थ्य देखभाल विशेषज्ञों का मानना है कि बंगाल में स्थिति बहुत गंभीर है क्योंकि ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली सरकार महामारी की वास्तविक गंभीरता का आकलन करने के लिए वास्तविक डेटा नहीं दे रही है।  इससे पहले पश्चिम बंगाल की ममता सरकार ने भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) पर उसे खराब टेस्टिंग किट देने का आरोप लगाया था। आईसीएमआर देश में कोविड-19 का परीक्षण करने के लिए जिम्मेदार संस्था है। ममता सरकार का कहना था कि, खराब किट की वजह से अनिर्णायक परिणाम आ रहे हैं जिससे जांच प्रक्रिया में देरी हो रही है।

ममता बनर्जी पर लग रहे तमाम आरोपों के बीच इंडियन मेडिकल असोसिएशन और अन्य 7 स्वास्थ्य संगठनों ने पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी को पत्र लिखा था। इस 11 सुत्रीय पत्र में बंगाल की मुख्यमंत्री से कोरोना के आकड़ों में पारदर्शिता रखने के साथ ही रियल टाइम डाटा और हर दिन मेडिकल बुलेटिन जारी करने की मांग भी की गई थी। इन सभी स्वास्थय संगठनों ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री से सभी स्वास्थ्य कर्मियों के लिए सुरक्षा सुनिश्चित करने और आईसीएमआर और विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के दिशानिर्देशों के अनुसार आवश्यक सुरक्षात्मक उपाय प्रदान करने का भी आग्रह किया था।

 

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