कोलकाता: कोविड अस्पतालों के दौरे के बाद केंद्रीय टीम ने मुख्य सचिव को लिखा पत्र, पूछा राज्य में इतने कम टेस्ट क्यों?

नई दिल्ली। राज्यपाल और ममता बनर्जी के बीच चल रहे तकरार के बीच, केंद्र की तरफ से बंगाल दौरे पर गई अंतर-मंत्रालयी केंद्रीय टीम  (IMCT) ने बंगाल के मुख्य सचिव को पत्र लिखकर कई सवालों के जवाब मांगे हैं। IMCT ने अपने पत्र में  23 तारीख को किए CNCI और बांगर अस्पताल के दौरे की जिक्र किया है। कोरोना संक्रमण की वजह से उपजे हालात का जायजा लेने बंगाल पहुंची IMCT टीम ने राज्य सरकार  अस्पतालों, क्वॉरेंटाइन सेंटरों और अन्य व्यवस्थाओं में अव्यवस्था पर स्पष्टीकरण मांगा है।  इसके साथ ही केंद्रीय टीम ने यह भी पूछा है कि बंगाल सरकार इतनी कम संख्या में सैंपल जांच क्यों कर रही है? जानकारी दें कि राज्य में कबतक 2500 से 5000 लोगों का टेस्ट प्रतिदिन शुरू हो सकेगा।

IMCT ने अपने पत्र में लिखा है – 

CNCI और बांगर अस्पताल के दौरे के बाद IMCT की टीम ने पाया कि अस्पताल में भर्ती मरीजों को 5 दिन या उससे ज्यादा दिनों तक टेस्ट रिजल्ट का इंतजार करना पड़ रहा है। CNCI अस्पताल में 4 मरीज 16 अप्रैल, 2 मरीज 17 अप्रैल और 3 मरीज 18 अप्रैल से भर्ती मरीजों को टेस्ट रिजल्ट नहीं मिला। और जब कल रिजल्ट आया तो उसमें से कुछ कोविड नेगेटिव पाए गए। टेस्ट रिपोर्ट आने में इतना समय क्यों लग रहा है और तब तक जो कोरोना से पीड़ित मरीज नहीं थे उनके जान को खतरे में क्यों डाला गया?

बांगुर अस्पताल में मरीजों के भर्ती की प्रक्रिया बहुत ही अफरातफरी वाली दिखी। अस्पताल में सोशल डिस्टेंसिंग का भी पालन सही नहीं हो रहा है।

बांगुर अस्पताल में  354 मरीज भर्ती है, लेकिन अस्पताल में केवल 12 वेंटीलेटर बेड उपलब्ध है। पूछने पर अस्पताल ने बताया कि जब वेंटिलेटर की जरूरत होती है और वेंटिलेटर उपलब्ध नहीं होता है तो  मरीजों को दूसरे मेडिकल फैसिलिटी में शिफ्ट कर दिया जाता है।

अन्य मेडिकल फैसिलिटी से बांगर अस्पताल में रेफेर मरीजों को स्वयं जाकर भर्ती होने के लिए छोड़ दिया गया। उन्हें अस्पताल पहुंचाने की कोई व्यवस्था नहीं की जा रही है। वे खुद ही अस्पताल आ रहे हैं, ऐसे में बहुत हद तक इसकी आशंका है कि मरीज अस्पताल न पहुंचें या देरी से पहुंचे।

बांगुर अस्पताल के आइसोलेशन वार्ड में शव पड़े होने और आसपास मरीजों को रखने पर भी केंद्रीय टीम ने जवाब मांगा है। अस्पताल के वार्ड में बेड पर 4 घंटे मरीज की लाश पड़ी रही पूछने पर अस्पताल ने बताया कि ये संभव क्योंकि कोविड से मृतक की डेथ सर्टिफिकेट मिलने तक शव बेड पर रहा हो, क्योंकि डेथ सर्टिफिकेट मिलने में 4 घंटे लगते हैं। ये स्पष्ट नहीं किया गया कि एक शव को मरीजों के बीच 4 घंटे क्यों रहने दिया गया और उसे शवगृह में नहीं भेजा गया।

 पत्र में कुछ अन्य जानकारियां भी मांगी गई हैं

राज्य में कोरोना का पहला मामला 8 मार्च को सामने आया था। इसके बाद विदेश से आए क्या सभी लोगों की जांच की गई, उनकी टेस्टिंग प्रोटोकॉल कब से शुरू की गई? जांच करने पर कितने लोग कोरोना संक्रमित पाए गए?

IMCT को बताया गया है कि राज्य में प्रतिदिन पहले 400 टेस्ट होते थे, लेकिन  पिछले 4 दिनों से 900 टेस्ट प्रतिदिन किए जा रहे हैं। हम जानना चाहते हैं कि इसमें कितने रिपीट टेस्ट और कितने फर्स्ट टाइम मरीज होते हैं।

जैसा कि जानकारी दी गयी है बंगाल बहुत से स्क्रीनिंग टीम का गठन किया गया है जो प्रतिदिन 1.25 लाख से 2 लाख लोगों की स्क्रीनिंग कर रहे हैं। ऐसे में सरकार बताएं कि जितने लोगों की स्क्रीनिंग की गयी है, उनमें से कितने लोग कोरोना पॉजिटिव पाये गये हैं?

इसके साथ ही केंद्रीय टीम ने यह भी पूछा है कि बंगाल सरकार इतनी कम संख्या में सैंपल जांच क्यों कर रही है? जानकारी दें कि राज्य में कबतक 2500 से 5000 लोगों का टेस्ट प्रतिदिन शुरू हो सकेगा।

क्या राज्य सरकार ने अबतक ऐसा कोई आदेश जारी किया है कि कोविड से लड़ाई लड़ रहे डॉक्टर और हेल्थ वर्कर्स स्वयं की रेगुलर जांच के लिए स्वतंत्र हैं। क्योंकि इस बावत राज्य के डॉक्टरों ने सोशल मीडिया पर नाराजगी और दुख व्यक्त किया है।

पत्र के अंत में अपूर्व चंद्रा ने लिखा है कि राज्य सरकार डॉक्टर और नर्सों और अन्य स्वास्थ्य कर्मियों को 10 लाख रुपये का स्वास्थ्य बीमा दे रही है, जबकि केंद्र सरकार ने 50 लाख का बीमा का प्रावधान किया है। राज्य सरकार ने उन्हें अवगत कराया है कि डॉक्टर इनमें से कोई भी बीमा योजना चुनने के लिए स्वतंत्र हैं। ऐसे में इससे संबंधित निर्देशिका क्यों नहीं जारी की गयी है बतायें?

वहीं इससे पहले भी केंद्रीय कमेटी ने पश्चिम बंगाल प्रशासन से इस बात पर नाराजगी जाहिर की थी कि पश्चिम बंगाल प्रशासन केंद्रीय कमेटी को पूरी तरह से सहयोग नहीं कर रहा है। केंद्रीय कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर केंद्र सरकार ने कड़ा पत्र पश्चिम बंगाल प्रशासन को भेजा था, जिसके जवाब में पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव ने केंद्र सरकार को पत्र लिखकर कहा था कि केंद्रीय कमेटी उनकी बिना जानकारी के आई थी लेकिन वे लोग पूरी तरह से सहयोग करने को तैयार हैं।

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