कोरोना वायरसः क्या चीन की तरह आंकड़े छिपा रही हैं ममता बनर्जी?

कोलकाता। चाइनीज वायरस से पूरी दुनिया में अबतक कोरोना से 1 लाख 97 हजार से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। दुनिया की सबसे ताकतवर मुल्क अमेरिका कोरोना के आगे बेबस नजर आ रहा है। लेकिन पूरी दुनिया में वायरस फैलाकर चीन अपने में ही इस कदर अनजान बना हुआ है कि मानो वहां कुछ हुआ ही नहीं  और ना इस वायरस के पीछे उसका कोई हाथ है। चीन की तरह ठीक इसी तरह का रवैया हिंदुस्तान में पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी ने अपना रखा है।

कोरोना को लेकर ममता बनर्जी की सरकार का रवैया शुरू से ही शक पैदा करने वाला रहा है। पहले दिन से ही पश्चिम बंगाल में कोरोना के टेस्ट को लेकर सवाल उठ रहे हैं। प. बंगाल में अभी भी पर्याप्त संख्या में कोरोना टेस्ट नहीं हो पा रहे हैं जिससे कोरोना के सही आंकड़े सामने नहीं आ रहे हैं। बीजेपी के नेताओं का आरोप है कि राज्य सरकार कोरोना के आंकड़े छिपाने के लिए पर्याप्त संख्या में जांच नहीं कर रही है लेकिन ममता बनर्जी हर बार इसे राजनीतिक आरोप बताकर खारिज कर देती हैं ।

इस बीच अब राज्य के मुख्य सचिव ने कोरोना से हो रही मौतों को लेकर एक पैनल की रिपोर्ट सार्वजनिक की है। इस रिपोर्ट का कहना है कि 57 में से 18 मौतें कोरोना संक्रमण की वजह से हुईं।मुख्य सचिव राजीव सिन्हा ने बताया कि सरकार ने राज्य में कोविड की वजह से हो रही मौतों की सही गणना के लिए एक पैनल का गठन किया था। इसने 57 मौतों का ऑडिट किया तो इसमें से 18 लोग संक्रमण की वजह से मारे गए। उन्होंने रिपोर्ट का हवाला देते बताया कि अन्य 39 मौतें गंभीर बीमारियों की वजह से हुईं। इनमें दिल से जुड़ी बीमारी, किडनी फेल्योर, डायबिटीज जैसे रोग शामिल हैं। उन्होंने बताया कि इस कमेटी का गठन 3 अप्रैल को किया गया था।

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दीदी के दावे और केंद्र के सवाल

वहीं ममता बनर्जी की सरकार के दावों को लेकर इंटर-मिनिस्ट्रियल सेंट्रल टीम यानी आईएमसीटी ने राज्य के मुख्य सचिव से कुछ जवाब मांगे हैं।

टीम ने मुख्य सचिव से कहा कि आप हमें यह बताइए कि राज्य में मौतें कोरोना से हुई हैं, यह बात तय करने के लिए डॉक्टरों की कमेटी ने किस प्रणाली का इस्तेमाल किया है?

टीम ने यह भी कहा कि जो भी प्रणाली इस्तेमाल की गई है, क्या वह इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईएमसीआर) की गाइडलाइन के हिसाब से सही है?

आईएमसीटी ने प. बंगाल में कोरोना टेस्ट की संख्या को लेकर भी सवाल उठाए थे। आईएमसीटी ने कहा था कि कोरोना वायरस के टेस्ट नतीजों के लिए कुछ मरीजों को 5 दिन से भी ज्यादा समय तक इंतजार करना पड़ रहा है। आपको रोजाना 2500 से 5000 तक टेस्ट करने चाहिए।

ममता सरकार का राज्यपाल और केंद्र से टकराव

कोरोना के खिलाफ लड़ाई में ममता बनर्जी सरकार की तरफ से जो लापरवाही बरती जा रही है संभवतया इसकी खबर कोलकाता के राजभवन तक लगातार पहुंच रही हैं इसीलिये राज्यपाल भी कई बार बयान जारी कर ममता सरकार आगाह कर चुके हैं लेकिन दीदी हर बार इसे राज्य सरकार के कामकाज में दखल की बात कह कर नजर अंदाज करतीं रहीं । इतना ही नहीं जब केन्द्र से पहुंचीं आईएमसीटी ने राज्य का दौरा किया तब भी ममता बनर्जी ने इस पर कड़ी आपत्ती जताते हुए इसे एक तरफा और अनचाहा बताया था।

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मुसलमानों की तुष्टिकरण में जुटी

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कोरोना जैसी महामारी के बीच भी ममता बनर्जी मुसलमानों के तुष्टिकरण में लगी हैं। मस्जिदों में अब भी लोगों की भीड़ जुट रही है और लोग बड़ी संख्या में एक साथ नमाज पढ़ने के लिए पहुंच रहे लेकिन पुलिस की तरफ से किसी प्रकार की सख्ती नहीं की जा रही है। इस तरह की घटनाओं का संज्ञान लेकर  केन्द्र सरकार अपनी नाराजगी भी जता चुकी है।

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