इमरान खान कैबिनेट में फेरबदल, मीडिया एवं विरोधियों को ठिकाने लगाने की कमान ISPR के पूर्व प्रमुख जनरल आसीम सलीम बाजवा को

नई दिल्ली। पाकिस्तान को कर्ज से उबार कर मदीना की रियासत या फिर फ़लाही रियासत बनाने जैसे इस्लामिक जुमलों को बेचकर सत्ता में आए इमरान खान के दिन जैसे लदने वाले हैं। कोरोना और आर्तिक मोर्चे पर लागातार हो रही नाकामी ने ना सिर्फ 1.5 साल में ही इमरान खान को अर्श से फर्श पर ला दिया है बल्कि देश में इमरान खान के खिलाफ लागातार गुस्सा बढ़ता जा रहा है।

देश के आम लोग तो आम लोग, देश की असली सरकार और एकमात्र ताकत, फौज को भी इमरान खान से मन भर गया लगता है। 2018 में हुए आम चुनाव में सेना ने इमरान खान के लिए नवाज शरीफ को पनामा पेपर केस में जेल भेजकर बिल्कुल खाली मैदान सौंपा था। लेकिन शायद इमरान को छोड़ सबको पता था कि 11 खिलाड़ियों के साथ क्रिकेट मैच जीतना और कर्ज में डूब चुके मुल्क को वो भी किसी कठपुतली हुकूमत का साथ चलाना कितनी मुश्किल है।

इमरान खान पाकिस्तान के लिए यू-टर्न का पर्याय बन गए हैं। बयान वीर तो वो पहले से ही थे। शायद इसलिए महज दो साल का भीतर उन्हें दो बार कैबिनेट में फेरबदल करना पड़ा है। पहला फेरबदल था देश के लिए कर्ज का जुटान नहीं कर पा रही टीम और आईएमएफ का दवाब और दूसरी बार कोरोना वायरस के मोर्चे पर विफल साबित हो रहे इमरान खान को डैमेज कंट्रोल करने और मीडिया में गिरती साख को बचाने के उद्देश्य से अपनी मीडिया टीम बदलनी पड़ी है। वर्ष 2018 में सत्ता में आने के बाद यह दूसरा मौका है, जब इमरान ने अपनी मीडिया टीम को बदला है।

इमरान खान ने सीनेट सदस्य और कई कमेटियों के चेयरमैन रहे शिब्ली फराज को पाकिस्तान का नया सूचना मंत्री बनाया है। बता दें कि फराज प्रख्यात दिवंगत उर्दू कवि अहमद फराज के बेटे हैं। वहीं देश और विदेश में कोरोना के मामलों को लेकर हो रही आलोचनाओं से नाराज चल रही पाक फौज को खुश करने के उद्देश्य से इमरान खान ने सेना के पूर्व प्रवक्ता लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) असीम सलीम बाजवा ने लिया है। असीम सलीम बाजवा तत्कालीन सेना प्रमुख रहील शरीफ के कार्यकाल में सेना के मीडिया विंग, इंटर सर्विसेज पब्लिक रिलेशन्स के महानिदेशक रह चुके हैं। बाजवा चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा प्राधिकरण के अध्यक्ष भी हैं।

बाजवा, इमरान खान के मिलिट्री सेक्रेटरी ब्रीगेडियर मोहम्मद अहमद के साथ मिलकर पाक फौज और इमरान खान के बीच बढ़ रही दूरियों को पाटने का काम करेंगे।

आसीम बाजवा को विशेष सूचना सलाहकार लगाने का उद्देश्य है मीडिया में बढ़ रही इमरान खान के खिलाफ नाराजगी को कम करना और जो ना मानें उनको ठिकाने लगाना जिसके लिए पाक फौज जानी भी जाती है।

बाजवा ने सूचना और प्रसारण मामले में प्रधानमंत्री की विशेष सलाहकार और बड़बोली नेता डॉ. फिरदौस आशिक अवान की जगह ली है। डॉ. फिरदौस को इस पद पर 18 अप्रैल 2019 को मंत्रिमंडल में फेरबदल के बाद नियुक्त किया गया था। इससे पहले भी इसी बड़बोलेपन और भारत के खिलाफ जहर उगलने की वजह से फवाद चौधरी को सूचना और प्रसारण मंत्री के पद से हटाया गया था।

जानकारों की माने तो यह बदलाव इसलिए किया गया, क्योंकि इमरान सरकार आए दिन यह आभास होने लगा था कि उनका मीडिया प्रबंधन अच्छा नहीं है, जिसके चलते वह सरकार के कामों को सही तरीके से नहीं दिखा पा रहे। हालांकि, विश्लेषक इमरान सरकार के इस फैसले से हैरान हैं। एक्सपर्ट्स का कहना है कि जब तक सरकार के उठाए कदमों से जनता को फायदा नहीं होगी तब तक नयी टीम भी सरकार की छवि नहीं सुधार पाएगी।

वहीं पाकिस्तानी समाचार चैनल ‘एआरवाई न्‍यूज’ के मुताबिक, फिरदौस आशिक अवान ने सरकारी विज्ञापन के बजट से 10 फीसदी कमीशन लेने की कोशिश की और सरकारी टीवी, पीटीवी के कोटे पर जरूरत से ज्‍यादा कर्मचारियों को रखा था। उन्होंने बिना अनुमति के दो सुरक्षा गार्ड समेत 9 कर्मचारियों को भी रखा था। उन्‍होंने तीन वाहन भी ले रखे थे, जिसकी अनुमति नहीं दी गई थी। यहां तक कि उन्‍होंने सफाई कर्मी और माली भी पीटीवी (PTV) के कोटे से लिया था। सूत्रों के मुताबिक प्रधानमंत्री इमरान खान को एक रिपोर्ट सौंपी गई थी और इसके बाद ही फिरदौस आशिक को उनके पद से हटाने का फैसला कर लिया गया था।

हालांकि फिरदौस अवान के खिलाफ यह चार्जशीट महज दिखावा है, असल वजह है आशिक अवान इमरान खान की नाकामी को मीडिया में मैनेज नहीं कर पा रहीं थीं और तो और उनके लिए इमरान सरकार के नक्कारेपन को उनके ही बड़बोलेपन ज्यादा हवा मिल रहा था। मीडिया को आए दिन भड़की देना और बिगड़े रिश्ते उनके फारिग होने की बड़ी वजह माना जा रहा है।

 

इमरान खान की पीटीआई सरकार ने फिरदौस आशिक को डीनोटिफाइ करके शिब्ली फराज को केंद्रीय सूचना मंत्री नियुक्त किया, वहीं असीम सलीम बाजवा को प्रधान मंत्री के विशेष सहायक के तौर पर नियुक्त किया। इसपर इमरान की अलोचना भी हो रही है। इन दिनों इमरान सरकार विपक्ष्रियों के निशाने पर है। उस पर भ्रष्‍टाचार और खास लोगों को फायदा पहुंचाने के आरोप लगाए जा रहे हैं।

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