बंगाल में बिना सरकार की अनुमति लिए कोरोना की जांच कर सकेंगे डॉक्टर,अमित मालवीय बोले, ममता सरकार के इस क्रूर एप्रोच के चलते कई लोगों ने अपनी जान गंवाई

नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल में डॉक्टर सरकार की अनुमति के बिना भी कोरोना की जांच कर सकेंगे। ममता सरकार ने आदेश जारी करते हुए बोला कि अब कोरोना वायरस के मरीजों का इलाज करने के लिए सरकार की अनुमति की आवश्यकता नहीं है। पहले कोरोना के इलाज के लिए डाॅक्टरों का अनुमति लेना अनिवार्य था। सरकार ने अपने आदेश में लिखा है, आईसीएमआर जांच के अंतर्गत अब किसी भी अस्पलात में किसी मरीज को भर्ती करने या इलाज करने या फिर व्यक्तिगत तौर पर कोरोना की जांच के लिए सरकार से अनुमति की कोई आवश्यकता नहीं है।


ममता के इस फैसले पर बीजेपी की आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय ने ट्वीट कर तंज कसा है। अपने ट्वीट में उन्होंने लिखा, भाजपा के लिए बड़ी जीत! आखिरकार, 38 दिनों के लॉकडाउन को बर्बाद करने के बाद, पश्चिम बंगाल सरकार ने आधिकारिक तौर पर अपने उस निर्देश को वापस ले लिया है, जिसमें पहले डॉक्टरों को कोरोना के व्यक्तिगत परीक्षण के लिए सरकार की मंजूरी लेनी पड़ती थी। दुखद है कि, बंगाल सरकार के इस दृष्टिकोण के चलते कई लोगों ने अपनी जान गंवाई।

मालवीय ने अपने दूसरे ट्वीट में लिखा कि बंगाल सरकार ने जानबूझकर कोरोना के आकड़ों को छुपाने के लिए यह तरीका अपनाया था, जबकि समय पारदर्शिता बरते जाने का है। अब पश्चिम बंगाल में डॉक्टरों की उस शिकायत के बाद यह एडवाईजरी जारी की गई है, जिसमें किसी भी व्यक्ति के कोरोना जांच के लिए ममता सरकार की अनुमति जरूरी थी।

गोरतलब है ममता सरकार पर राज्य में कोरोना के आकड़े छुपाने के लेकर आरोप लग रहे हैंं। इसके साथ ही केंद्र से गई टीम को भी सहयोग न करने के आरोप ममता सरकार पर लगे थे।  राज्यपाल जगदीप धनखड़ ने ममता सरकार पर आरोप लगाया था कि ममता सरकार कोरोना से निपटने में असफल रही है। राज्यपाल ने ममता सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा था कि, वे इस वक्त में राजनीति मुनाफा देखने में लगी हुई है। वहीं ममता बनर्जी ने पत्रकारों पर भी हमला बोला था। पत्रकारों पर निशाना साधने हुए उन्होंने बोला कि, वे सही से बर्ताव नहीं करते  तो उन पर वे आपदा प्रबंधन अधिनियम के तहत केस कर सकती हैं।

कोरोना आकड़ों में पारदर्शिता बरते जाने को लेकर, इंडियन मेडिकल असोसिएशन और अन्य 7 स्वास्थ्य संगठनों ने पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी को पत्र लिखा था। इस 11 सुत्रीय पत्र में बंगाल की मुख्यमंत्री से कोरोना के आकड़ों में पारदर्शिता रखने के साथ ही रियल टाइम डाटा और हर दिन मेडिकल बुलेटिन जारी करने की मांग भी की गई थी। इन सभी स्वास्थय संगठनों ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री से सभी स्वास्थ्य कर्मियों के लिए सुरक्षा सुनिश्चित करने और आईसीएमआर और विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के दिशानिर्देशों के अनुसार आवश्यक सुरक्षात्मक उपाय प्रदान करने का भी आग्रह किया था।

 

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