मजदूर दिवसः हेमार्केट गोलीकांड के बाद ऐसा क्या हुआ जिसने पूरी दुनिया के मजदूरों की आत्मा हिला दी?

नई दिल्ली। दुनिया में अगर हम आज ऐशो आराम की जिंदगी जी रहे हैं, आज दुनिया की जिस चमक पर हम गर्व कर रहे हैं, ये सब मजदूरों की ही देन है। किसी भी देश के विकास की रीढ़ उनके मजदूर होते हैं। अगर ये कहा जाए, कि दुनिया को चलाने में मुख्य भूमिका मजदूरों की होती है तो ये कहना गलत नहीं होगा। अगर मजदूर न होते, तो शायद ये चमक भी न होती। ऐसे में मजदूर दिवस पर हमें इन कामगारों की मेहनत को याद करते हुए इन्हें धन्यवाद करना चाहिए।

1 मई को दुनिया के कई देश मजदूर दिवस मनाते हैं। भारत में पहली बार 1 मई 1923 को हिंदुस्तान किसान पार्टी ने मद्रास में मजदूर दिवस मनाया था। 1 मई को 80 से ज्यादा देशों में राष्ट्रीय छुट्टी होती है। वहीं, कनाडा में मजदूर दिवस सितंबर के पहले सोमवार को मनाया जाता है। इस दिन को लेबर डे, मई दिवस, श्रमिक दिवस और मजदूर दिवस भी कहा जाता है। ये दिन पूरी तरह श्रमिकों को समर्पित है।

क्यों मनाया जाता है मजदूर दिवस?

अंतरराष्ट्रीय मजदूर दिवस की शुरुआत मई 1886 में अमेरिका के शिकागो से हुई थी। शिकागो में शहीद मजदूरों की याद में पहली बार मजदूर दिवस मनाया गया। यहां 1 मई 1886 को मजदूरों ने एक आंदोलन छेड़ दिया था। हजारों की संख्या में मजदूर सड़क पर आ गए थे। ये मजदूर लगातार 10-15 घंटे काम कराए जाने के खिलाफ हड़ताल पर आ गए थे। मजदूर यूनियन काम का समय 8 घंटे तय किए जाने की मांग कर रहे थे। इस दौरान हेमार्केट में एक बम धमाका भी हुआ। तभी पुलिस ने प्रदर्शनकारियों से निपटने के लिए मजदूरों पर गोलियां चला दीं। इस हादसे में कई मजदूर मारे गए।

इसके बाद साल 1889 में पेरिस में एक अंतर्राष्ट्रीय समाजवादी सम्मेलन का आयोजन किया गया। यहां ऐलान किया गया कि हेमार्केट नरसंघार में मारे गए मजदूरों की याद में हर साल 1 मई को अंतर्राष्ट्रीय मजदूर दिवस मनाया जाएगा। इस दिन कामगारों के अवकाश का भी ऐलान किया गया।

8 घंटे काम करने की मांग

1886 में मई डे के मौके पर 8 घंटे काम की मांग को लेकर 2 लाख मजदूरों ने देशव्यापी हड़ताल कर दी थी। उस दौरान काफी संख्या में मजदूर सातों दिन 12-12 घंटे लंबी शिफ्ट में काम किया करते थे और सैलरी भी कम थी। बच्चों को भी मुश्किल हालात में काम करने पड़ रहे थे। अमेरिका में बच्चे फैक्ट्री, खदान और फार्म में खराब हालात में काम करने को मजबूर थे।

इसके बाद मजदूरों ने अपने प्रदर्शनों के जरिए सैलरी बढ़ाने और काम के घंटे कम करने के लिए दबाव बनाना शुरू किया। 1889 में पेरिस में अंतरराष्ट्रीय महासभा की बैठक हुई। इस दौरान प्रस्ताव पारित किया गया कि तमाम देशों में अंतरराष्ट्रीय मजदूर दिवस मनाया जाएगा।

1923 में पहली बार भारत में मनाया गया मजदूर दिवस

भारत में पहली बार मजदूर दिवस 1 मई 1923 को मनाया गया। इसकी शुरुआत चेन्नई से हुई। लेबर किसान पार्टी ऑफ हिन्दुस्तान के नेता कामरेड ‘सिंगरावेलू चेट्यार’ की अध्यक्षता में पहली बार भारत में मजदूर दिवस मनाया गया, जब मद्रास हाईकोर्ट सामने एक बड़ा प्रदर्शन किया गया।

एक संकल्प पास करके यह सहमति बनाई गई कि अब से हर साल एक मई को भारत में भी मजदूर दिवस के रूप में मनाया जाएगा। इस दिन लेबर डे हॉलीडे का ऐलान किया गया।

यहां पर साल में दो बार मनाया जाता है मजदूर दिवस

इंटरनेशनल लेबर डे पूरे दुनियाभर में मनाये जाने वाला एक पर्व है। जिसे इंडिया में मजदूर दिवस के नाम से जाना जाता है।इसके अलावा इसे इंटरनेशनल वर्कर डे, श्रमिक दिवस और मई डे के नाम से भी सम्बोधित करते हैं। मजदूर दिवस 1 मई को पूरी दूनिया में मनाया जाता है। दूनिया के लगभग 80 देशों में इस दिन हॉलीडे होता है। अमेरिका और कनाडा में मजदूर दिवस सितम्बर महीने के पहले सोमवार को होता है। जहां एक ओर इस दिन छुट्टी होती है वहीं दूसरी ओर इस दिन कई तरह के कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। लोग एक-दूसरे को इस दिन विश भी करते हैं। मेहनत से काम करने वाला हर एक शख्स मजदूर है इसलिए इस शब्द से आहत होने की जगह खुश रहें।

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