देश मे टैक्स टेरर फैलाने के आरोप में नपे 3 IRS अफसर, मोदी सरकार ने दिया चार्जशीट दाखिल करने का आदेश

नई दिल्ली। मोदी सरकार ने इंडियन रेवेन्यू सर्विसेज के तीन अफसरों के खिलाफ नोटिस जारी किए हैं। इन तीनों अधिकारियों और आयकर विभाग के अन्य अफसरों पर यह आरोप है कि इन्होंने कोरोना से लड़ने के लिए बिना अनुमति फिस्कल ऑप्शन ऐंड रिस्पांन्स टू द कोविड-19 एपिडेमिक नाम के एक पॉलिसी पेपर को तैयार किया और फिर इसे सोशल मीडिया पर सार्वजनिक कर दिया।

हाल ही में 1 करोड़ से ज़्यादा कमाने वाले लोगों पर 40 प्रतिशत आयकर लगाने का घटिया सुझाव देने वाले आईआरएस अफसरों के विरुद्ध कड़ा एक्शन लेते हुए मोदी सरकार ने नियमों का उल्लंघन करने हेतु चार्जशीट दाखिल की है।

हिन्दुस्तान टाइम्स से बात करते हुए एक सरकारी अफसर ने इस कदम के पीछे का तर्क समझाते हुए बताया, “इस रिप्रोट के कारण देश भर में लोगों में टैक्स नीति को लेकर डर फैलने लगा और देश की आर्थिक स्थिति के हिसाब से ये एक बेहद गैर जिम्मेदाराना कदम था”।

IRS

27 अप्रैल को हिन्दुस्तान टाइम्स में छपी एक रिपोर्ट के अनुसार जिन तीन आईआरएस अफसरों ने इस वाहियात रिपोर्ट को बनाने में प्रमुख भूमिका निभाई, उनके विरुद्ध चार्जशीट आधिकारिक रूप से दाखिल की गई है। इससे पहले मोदी सरकार ने ऐसे टैक्स टेररिज्म के सामने घुटने टेकने से साफ मना कर दिया था।

सरकार ने जिस रिपोर्ट को लेकर इन अफसरों पर कार्रवाई की है, उसमें सुपर रिच क्लास पर अतिरिक्त टैक्स लगाने और कोविड सेस की व्यवस्था करने का सुझाव दिया गया था। कार्रवाई का आदेश देने के साथ ही इन अधिकारियों को अपना पक्ष रखने के लिए नोटिस भी जारी किए गए हैं।

मोदी सरकार ने इस गैर जिम्मेदाराना रवैये पर सख़्त कारवाई करने का फैसला किया है।  सरकार ने जिन अफसरों को नोटिस जारी किया है, उनमें आयकर विभाग के प्रिंसिपल कमिश्नर प्रशांत भूषण, प्रिंसिपल डायरेक्टर इन्वेस्टिगेशन संजय बहादुर और डायरेक्टर डिपार्टमेंट और पर्सनल ऐंड ट्रेनिंग प्रकाश दूबे के शामिल हैं। प्रशांत भूषण फिलहाल इंडियन रेवेन्यू सर्विसेज के जनरल सेक्रेटरी भी हैं और उन्होंने ही को इस कथित रिपोर्ट को सोशल मीडिया पर शेयर किया था।

सरकारी सूत्रों के अनुसार इन अफसरों ने ना सिर्फ इस तरह की भ्रामक रिपोर्ट बना्ई बल्कि अपने से 30 साल जूनियर अफसरों को भी बरगलाने की कोशिश की। सरकार के अनुसार इन अधिकारियों ने ना सरकार से इस रिपोर्ट बनाने की इजाजत ली और ना ही इसको साझा करने के लिए सरकारी मशीनरी की इजाजत लेना उचित समझा। इन अफसरों ने इस रिपोर्ट को सीधे मीडिया से साझा कर दिया।

TFI Post, के अनुसार इससे पहले भी मोदी सरकार ने नौकरशाही को ऐसे कड़े संदेश समय समय पर भेजे हैं। पिछले वर्ष ही कई भ्रष्ट अफसरों के विरुद्ध केंद्र सरकार ने युद्धस्तर पर कार्रवाई की थी। चाहे वो आईआरएस हो या फिर आईएएस, जो भी सरकार के नीतियों पर खरा नहीं उतरा, उसे तुरंत कंपल्सरी रिटायरमेंट प्रदान की गई।

वहीं वित्त मंत्रालय ने अपने बयान में साफ किया कि, “आईआरएस अफसरों के एक समूह ने फोर्स नामक बेबुनियाद रिपोर्ट तैयार की, जिसमें वुहान वायरस जैसी महामारी के समय में राजस्व जुटाने के लिए धनी लोगों पर कर दर बढ़ाने, COVID-19 सेस लगाने, एमएनसी पर सरचार्ज बढ़ाने की बात कही थी। जिस तरह से इन्होंने यह सुझाव मीडिया से साझा किया, वह एक गैर जिम्मेदाराना कार्य है और कुछ अफसरों की मिलीभगत से की गई एक शरारत है। सरकार या आईआरएस एसोसिएशन ने ऐसे किसी रिपोर्ट के लिए स्वीकृति नहीं दी थी”।

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