पख्तून तहफ्फुज मूवमेंट (पीटीएम) के नेता आरिफ वजीर की हत्या, पश्‍तूनों ने कहा ‘स्टेट किल्ड आरिफ वजीर’

नई दिल्ली। पाकिस्तानी अखबार डॉन की खबर के मुताबिक पाकिस्तान में पख्तून तहफ्फुज मूवमेंट (पीटीएम) के नेता और कौमी एसेंबली के सदस्य अली वज़ीर के भाई आरिफ वजीर की गोली मारकर हत्या कर दी गई है। वजीर एक महीने पहले ही जमानत पर जेल से बाहर आए थे। खैबर पख्तूनख्वा जिले के वाना में शुक्रवार को उनको घर के बाहर ही गोली मारी गई थी।

वाना, पाकिस्तान के खैबर पख्तूनवा प्रांत का दक्षिण वजीरिस्तान जिला है। बता दें कि पीटीएम, पश्‍तूनों के मानवाधिकारों के लिए चलाया गया एक मूवमेंट है। इसकी शुरूआत खासतौर पर खैबर पख्‍तून्‍ख्‍वां और बलूचिस्‍तान में रहने वाले पश्‍तूनों के लिए की गई थी।

 

आरिफ वजीर अपने परिवार का 18वां सदस्य था जिसे सेना क सह पर हत्या की गयी है। पीटीएम के अन्य नेता औरंग जेब खान जल्माय ने बताया कि वजीर को मारने वाले ये अनजान लोग पाकिस्तान के राज्य प्रायोजित आतंकवादी हैं, जिन्हें पाकिस्तानी सेना अच्छे तालिबानी कहकर बुलाती है।

पाकिस्तान में वे लोग जो अफगानिस्तान और पश्‍तूनों को मारते हैं वे पाकिस्तानी फौज के लिए गुड तालिबान है और जो पाक के अंदर सेना और अन्य लोगों पर हमले करती है उसे सेना बैड तालिबान कहती है।

जल्माय ने कहा कि पाकिस्तानी सेना इन्हें अच्छे तालिबानी बताती है और इन्हें सेना का साया (shadow army) मानती है। उन्होंने आगे कहा कि आरिफ वजीर और उनका परिवार पिछले 20 सालों से इन आतंकवादियों से लड़ रही है। पाक फौज इन्हें अपनी फर्सट लाईन ऑफ़ डिफेंस के रूप में इस्तेमाल करती आई है।

जल्माय के अनुसार, “आरिफ वजीर खुलकर बोलने वाला साहसी व्यक्ति था अक्सर आतंकवााद पर युद्ध में पाकिस्तान की सेना की संदिग्ध भूमिका पर सवाल उठाता था। पाकिस्तानी सेना की संदिग्ध भूमिका पर की गई इसी टिप्पणी को लेकर आरिफ को कई बार जेल भी जाना पड़ा है। उन्होंने पिछले कुछ सालों में 14 महीने जेल में बिताए हैं।”
पश्तून तहफूज मूवमेंट (PTM) ने एक ट्वीट में हमले की निंदा करते हुए कहा, “आरिफ वजीर एक लक्षित हमले में मारे गए अली वजीर के परिवार का 18 वां सदस्य थे। उनके परिवार ने राष्ट्र के लिए सबसे अधिक त्याग किया है। आरिफ एक असाधारण व्यक्ति थे। आरिफ राजनीतिक कार्यकर्ता और दक्षिण वजीरिस्तान के एक युवा नेता थे। दुखद।”

बता दें कि इससे पहले स्वीडन में बलूच पत्रकार साजिद हुसैन की रहस्यमयी तरीके से मौत हो गई थी। माना जाता है कि इन समन्वित हमलों के पीछ इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस (ISI)है। पाकिस्तान सेना ने देश विरोधी एजेंडा चलाने के लिए पीटीएम को जिम्मेदार ठहराया है, जबकि मंजूर पश्तीन की अगुवाई वाली पार्टी पश्तून बहुल इलाकों में नागरिकों पर सेना के अत्याचारों के खिलाफ आवाज उठा रही है।

सोशल मीडिया पर एक हैशटैग #StateKilledArifWazir भी लॉन्च किया गया है। पाकिस्तान और अफगानिस्तान में रहने वाले पश्तूनों ने हत्या की निंदा की है।

अफगानिस्तान के ज़ुरमत इलाके में एक उद्यमी इकबाल रसूली ने अपने ट्वीट में लिखा, “#ISI अपराधियों द्वारा किया गया एक और दुर्भाग्यपूर्ण दुखद नुकसान है।

आरिफ वजीर पीटीएम कार्यकर्ताओं की गंभीर चोटों से जूझते हुए मौत हो गई है। आइएसआइ पश्तून और बलोच कार्यकर्ता को आजादी के लिए निशाना बनाता रहा है। अंतर्राष्ट्रीय समुदाय और हमारे सहयोगी इस मुद्दे को नजरअंदाज करते रहे हैं।”

एक प्रमुख बलूच पत्रकार साजिद हुसैन की 30 अप्रैल को स्वीडन में रहस्यमय तरीके से हत्या कर दी गई थी। 39 वर्षीय साजिद बलूचिस्तान टाइम्स के एडिटर-इन-चीफ थे।

उनको पुलिस ने उप्साला की एक नदी में मृत पाया था। वह दो मार्च से लापता था। साजिद नें 2012 में पाकिस्तान छोड़ दिया था और 2017 से स्वीडन में शरणार्थी के रूप में रह रहे थे।

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