पाकिस्तान को चाहिए सीवर साफ करने वाले कर्मचारी, सिर्फ ईसाईयों से मांगा आवेदन

नई दिल्ली। पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों के ऊपर अत्याचार की कई कहानियां आए दिन आती रहती है। पाकिस्तान धार्मिक अल्पसंख्यकों की स्थिति से हम वाकिफ हैं।अब पाक ने एक बार फिर शर्मनाक हरकत की है। पाकिस्तान को सफाईकर्मी चाहिए जो ईसाई धर्म का होना चाहिए। न्यूयाॅर्क टाइम्स ने अपनी एक रिपोर्ट में लिखा है, पाक में सीवर की सफाई के लिए सफाई कर्मचारियों के लिए आवेदन मांगे। लेकिन इसके लिए सिर्फ पाकिस्तान के ईसाई धर्म के लोग ही अप्लाई कर सकते हैं। हालांकि मानवाधिकार संगठनों के प्रदर्शन के बाद आवेदन वापस ले लिया गया।

न्यूयॉर्क टाइम्स’ ने अपनी खबर में एक ईसाई सफाईकर्मी एरिक जमशेद के बारे में भी बताया गया है। जो पाक में गटर साफ करने का काम करता है।

न्यूयॉर्क टाइम्स ने लिखा है,  हिंदुओं के साथ होने वाले भेदभाव की वजह से उन्होंने अपना धर्म परिवर्तन कर लिया और ईसाई बन गए। लेकिन उनके हालात नहीं बदले। ईसाई धर्म अपनाने के बाद भी उन्हें अच्छी नजर से ही देखा गया।

न्यूयॉर्क टाइम्स ने बताया गया है कि कैसे पाकिस्तान में ईसाइयों के साथ भेदभाव वाला व्यवहार किया जाता है, उनकी स्थिति समाज में सबस बदतर बनाकर रखी गई है। एरिक ने न्यूयाॅर्क टाइम्स से बात करते हुए बताया, ये सबसे मुश्किल काम है। बिना मास्क और ग्लव्स के सीवर में उतरना पड़ता है। सीवर की गदंगी और जहरीली गैसों से बचने का उसके पास कोई उपाय नहीं होता है। सबकुछ भगवान भरोसे होता है। पाकिस्तान में इसके चलते कई ईसाई सफाईकर्मियों की मौत भी हुई है।

न्यूयाॅर्क टाइम्स ने अपनी खबर में लिखा है पाकिस्तान में धर्म और जातियों को लेकर खूब भेदभाव होता है, हिंदुओं की नीचली जातियों के साथ भी भेदभाव होता है। पाकिस्तान में एरिक की तरह के लोगों के लिए न खाने की ठीक व्यवस्था है और न ही उन्हें पीने का साफ पानी मिल पाता है।

आगे न्यूयाॅर्क टाइम्स ने लिखा, ऐसा नहीं है कि मुसलमानों को नालियों की साफ-सफाई के लिए हायर नहीं किया गया। ऐसी कोशिशें की गई। वो नालियों में उतरने और गटर साफ करने को तैयार ही नहीं होते। मुसलमान सफाईकर्मी सड़कों पर झाड़ू लगाने के अलावा कुछ नहीं करते।

घंटों नाले में रहने के कारण ईसाई सफाईकर्मियों का शरीर भी तमाम रोगों से घिर जाता है। वहीं डॉक्टर भी इलाज से इनकार कर देते हैं इन्हें अछूत समझा जाता है।

न्यूयाॅर्क टाइम्स से बात करते हुए एरिक ने बताया कि उसने अपने बच्चे को घर से काफी दूर के एक स्कूल में दाखिला दिलवाया है। ताकि उसके बच्चों को भेदभाव का सामना न करना पड़े। जिस तरह उनके पूर्वजों ने धर्मांतरण करके इस चक्र को तोड़ने की कोशिश की थी। वो भी चाहते हैं कि उनके बच्चे इस स्थिति से बाहर निकले, लेकिन उनके बच्चों के साथ भी भेदभाव होता है। उनसे पिता वाला पेशा अपनाने के लिए मजबूर किया जाता है।

हालांकि आधिकारिक तौर पर, पाकिस्तान अल्पसंख्यकों के ऊपर किसी तरह के अत्याचार व भेदभाव से लगातार इंकार करता है, लेकिन सच्चाई पाक के बयान के बिल्कुल उलट है। पाकिस्तान में हिन्दुओं और सिखों के साथ भी अक्सर बुरा व्यवहार होता है। हिन्दू शरणार्थियों के साथ जानवरों जैसा व्यवहार किया जाता है। हिंदू लड़कियों को आए दिन अगवा कर उनका जबरन धर्म परिवर्तन कर दिया जाता है। लेकिन वहांं की सरकार  इन बातों से इनकार करती है।

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