US द्वारा UN में ताईवान की भागीदारी की वकालत पर तिलमिलाया चीन, होंडुरास सहित अन्य देशों की भी यही मांग

नई दिल्ली। अमेरिका कोरोना महामारी को लेकर चीन को छोड़ने के मूड में नहीं है। पहले राष्ट्रपति ट्रम्प ने अकेले ही दुनियाभर में कोरोना वायरस को पहले चीनी वायरस फिर वुहान वायरस के रूप में स्थापित किया और अब ताईवान के सहारे  चीन पर हमले की धार और स्ट्रैटेजी को बढ़ा और सख़्त कर दिया है।

संयुक्त राष्ट्र में ताईवान की भागीदारी के समर्थन में शुक्रवार को अमेरिका ने ट्वीट किया जिस पर चीन ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है और अपना विरोध दर्ज कराया है। अमेरिकी दूतावास की तरफ से किए गए ट्वीट में कहा गया है कि 193 सदस्यीय वैश्विक संगठन का निर्माण हर किसी की सेवा के लिए किया गया था, जिसमें विभिन्न विचारों और पहलुओं का स्वागत है और मानवाधिकारों को बढ़ावा देना है.

ट्वीट में कहा गया है, ‘संयुक्त राष्ट्र में ताईवान का आना न केवल ताईवान के लोगों के लिए गौरव का क्षण है, बल्कि संयुक्त राष्ट्र के सिद्धांतों के अनुरूप है।’ कोरोना वायरस महामारी को लेकर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा चीन की आलोचना के बाद अमेरिकी प्रशासन ने ताईवान का मुद्दा उठाया है।

चीन ताइवान पर अपनी संप्रभुता का दावा करता है और अपने राजनयिक प्रभुत्व के मार्फत इस द्वीपीय राष्ट्र को किसी भी संगठन में शामिल होने से रोकता है जहां सदस्यता राष्ट्रों को मिलती है। संयुक्त राष्ट्र मिशन में चीन के प्रवक्ता ने अमेरिकी दूतावास के ट्वीट को महासभा के प्रस्ताव का ”गंभीर उल्लंघन” करार दिया। प्रवक्ता ने कहा, ”यह चीन के अंदरूनी मामलों में गंभीर हस्तक्षेप है और इससे 1.4 अरब के चीन के नागरिक आहत हुए हैं। दुनिया में केवल एक चीन है।”

चीन का प्रभाव इस  हद तक है कि WHO या कोई भी चीन के इजाज़त के बगैर कोई भी ताईवान का नाम लेना तो दूर ताईवान का नाम तक नहीं ले सकता है। हांगकांग के एक चैनल, ‘RTHK’ द्वारा किया गया यह इंटरव्यू सोशल मीडिया पर काफी वायरल हुआ। वायरल की लौ इतनी थी की ‘WHO’ को इसपर स्पष्टीकरण देना पर गया।

कोरोना महामारी से सबसे ज्यादा परेशान अमेरिका, जर्मनी, ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया ने दुनियाभर में कोरोना वायरस के प्रसार को लेकर चीन को जिम्मेदार ठहराया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वायरस से ठीक ढंग से नहीं निपटने का आरोप लगाते हुए चीन को दंडित करने के औजार के रूप में आयात शुल्क वृद्धि के संकेत दिए थे।

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जानकारी के लिए बता दें कि, ताईवान ने दिसंबर 27 को ही कोरोना महामारी से ह्यूमन टू ह्यूमन ट्रांसमिशन के संकेत दिये थे लेकिन चीन के दवाब में WHO ने इस बात से तब तक इनकार करती रही जब तक चीन ने स्वयं इस बात की पुष्टि ना कर दी।

वहीं चीन की दादागिरी से परेशान दुनिया के देश अब धीरे धीरे ताईवान की महत्ता को समझने लगे हैं और ताईवान के वैश्विक मंच पर प्रतिनिधित्व की वकालत करने लगे हैं। होंडुरास के संयुक्त राष्ट्र में स्थाई दूत की तरफ से अन्य देशों के समुह  के साथ बैठक कर WHO के महानिदेशक से बात कर ताईवान को वर्लड हेल्थ असेंबली और अन्य मंचों पर बुलाने की मांग की।

 

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