असम ने की चीन से व्यापार समेटने वाली कंपनियों को अपने यहां लाने की तैयारी

नई दिल्ली।  कोरोना महामारी के कारण आज वैश्वक अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान हुआ है। उद्योग -धंधे बंद हैं, लोगों का रोजगार छिन गया है। और इन सबके पीछ दुनिया के ज्यादातर देश चीन को जिम्मेवार मान रहे हैं। चीन को लेकर नाराजगी इस कदर है कि तमाम देश अपना व्यापार चीन से समेटने की तैयारी कर रहे हैं। जापान ने तो इसका ऐलान भी कर दिया है। चीन से अपने कंपनियों को निकालने के लिए जापान ने बड़े आर्थिक पैकेज की घोषणा की है।

वहीं चीन से बाहर निकलने वाली कंपनियों को भारत, अपने यहां उद्योग लगाने के लिए आकर्षित करने का प्रयास कर रहा है। इसी कड़ी में चीन से बाहर निकलने वाले उद्योगों को अपने राज्य में आकर्षित करने के लिए असम ने प्रयास शुरू किए हैं।  असम के उद्योग मंत्री चंद्र मोहन पटवारी ने कहा कि, राज्य सरकार ने उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्द्धन विभाग (DPIIT) , इन्वेस्ट इंडिया, जापान विदेश व्यापार संगठन (JETRO) , अमेरिका-भारत व्यापार परिषद और यूएस चैंबर ऑफ कॉमर्स से कंपनियों को इस बारे में सलाह देने की मांग की है।

पटवारी ने पत्रकारों से बातचीत में कहा, अमेरिका, जापान और कोरिया की कई कंपनियां दक्षिण पूर्व एशिया में वैकल्पिक स्थान पर अपनी फैक्ट्रियां लगाने की संभावनाओं पर विचार कर रही हैं। हम इन कंपनियों को असम में आकर्षित करने का प्रयास करेंगे।

पटवारी ने कहा असम में प्राकृतिक संसाधन बहुतायत में हैं। साथ ही यहां औद्योगिक ढांचा काफी मजबूत है।  हमें स्थानीय स्तर पर भी लाभ मिलता है, यहां से उत्पादों को दक्षिण-पूर्व एशिया, बांग्लादेश, नेपाल, भूटान और पश्चिमी चीन के बाजारों में आसानी से भेजा जा सकता है। असम में नदी बंदरगाह और अच्छी रेल, सड़क और हवाई संपर्क है। जल्द ही एशियाई राजमार्ग  पूर्ण होने वाला है, जो म्यांमार के जरिए असम को बांग्लादेश और दक्षिण- पूर्व एशिया  से जोड़ देगा। बांग्लादेश के समुद्री बंदरगाह भी बहुत जल्द ही असम के जलमार्ग, सड़कों और रेल के माध्यम से जुड़ जाएंगे, इस प्रकार असम में निर्मित माल के लिए बांग्लादेश (चटगांव, पयारा और मोंगला) में उन बंदरगाहों तक त्वरित पहुंच सक्षम हो जाएगी।

इसके साथ ही उन्होंने कहा कि हम लाॅकडाउन खत्म होने के बाद उद्योगिक गतिविधियों को तेजी देने के उद्देश्य से कई परियोजनाओं पर काम कर रहे हैं। “हम सड़कों, पुलों और अन्य सुविधाओं के निर्माण में बड़े पैमाने पर निवेश करेंगे, जो राज्य के भीतर कनेक्टिविटी बढ़ाएंगे। यह राज्य की अर्थव्यवस्था को गति देने के साथ ही निवेश के लिए असम की क्षमता को बढ़ाएगा।
कोरोना महामारी के बाद दुनिया के कई देश चीन से खुली तौर पर अपनी नाराजगी जाहिर कर चुके हैं।  और अपना व्यापार चीन से समेटने की तैयारी कर रहे हैं। भारत इसे अपने लिए एक मौके के रूप में देख रहा है।  चूंकि कोरोना के कारण  भारत की अर्थव्यवस्था नाजुक दौर से गुजर रही है। ऐसे में यदि कंपनियां भारत में आकर निवेश करती हैं तो भारत की अर्थव्यवस्था को बूस्ट मिलेगा।  साथ ही रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।

पिछले दिनों प्रधानमंत्री मोदी ने भारत में विदेशी निवेश को आकर्षित करने के साथ ही स्थानीय निवेश को बढ़ावा देने व अर्थव्यवस्था को मजबूती देने की रणनीतियों पर चर्चा के लिए एक बैठक भी आयोजित की थी। बैठक के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि, निवेशकों को केंद्र व राज्य स्तर पर किसी प्रकार की मंजूरी मिलने में देरी व कोई समस्या न हो इसका ध्यान रखा जाए। इससे देश में निवेश करने वाली कंपिनयों को फायदा होगा और उन्‍हें जल्‍द से जल्‍द काम शुरू करने में मदद मिलेगी।

 

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