चीन में कारोबार कर रहीं 1000 से ज्यादा अमेरिकी कंपनियां करेंगी भारत का रुख !

नई दिल्ली। कोरोना महामारी ने पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था  को चौपट कर दिया है। इस महामारी के लिए और उससे उपजे आर्थिक संकट के लिए तमाम देश चीन को जिम्मेदार मान रहे हैं। इस महामारी का असर चीन के साथ  व्यापारिक संबंधों पर भी पड़ने लगा है। जापान ने तो अपनी कंपनियों को चीन से निकालने के लिए बड़े आर्थिक पैकेज का एलान भी कर किया है। वहीं इस महामारी के चलते अमेरिका को सबसे ज्यादा नुकसान हुआ है। अमेरिका में तकरीबन 13 लाख लोग कोरोना की चपेट में आ चुके हैं वहीं 80 हजार के लगभग अपनी जान गंवा चुके हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप इस सबके लिए चीन को ही जिम्मेदार बताते हैं और बार – बार चीन को इसके लिए अंजाम भुगतने की धमकी देते रहते हैं। चीन और अमेरिका के मध्य भी व्यापारिक संबंध है। लेकिन दोनों देशों के बीच ट्रेड वाॅर चलता रहता है। अब इस महामारी के कारण दोनों देशों के बीच के व्यापारिक और कूटनीतिक संबंध और बिगड़ते हुए नजर आ रहे हैं।

वहीं भारत ने इस ट्रेड वाॅर को देखते हुए अमेरिकी कंपनियों को चीन से निकालकर भारत लाने की कोशिशें शुरू कर दी है। ब्‍लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के अनुसार, सरकार द्वारा अमेरिका में 1000 से ज्‍यादा कंपनियों से संपर्क किया गया है। साथ ही उच्‍चायोगों के जरिए भी संपर्क बनाया गया है। ऐसी कंपनियां जो चीन से बाहर मैन्‍यूफैक्‍चरिंग लेकर जाने पर विचार कर रही हैं, उन्‍हें कई तरह के पैकेज की पेशकश भी भारत की तरफ की गई है। सूत्रों की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक भारत की प्राथमिकता मेडिकल उपकरण सप्‍लाई करने वाली कंपनियां हैं। इसके अलावा फूड प्रोसेसिंग यूनिट्स, टेक्‍सटाइल्‍स, चमड़ा और ऑटो पार्ट्स बनाने वाली ऐसी कंपनियों से संपर्क किया गया है जो 550 से ज्‍यादा उत्‍पादों को तैयारी करती हैं।

अमेरिका का आरोप है कि चीन ने वायरस से निपटने में तेजी नहीं दिखाई। जिसके चलते आज लाखों लोगों की जान जा चुकी है। और वैश्विक अर्थव्यवस्था बुरी तरह चरमरा गई है। जिसके कारण आज कई कंपनियों और सरकारों ने अपने संसाधनों को चीन से बाहर दूसरे देशों में फैलाना शुरू कर दिया है। जापान ने तो इसके लिए तैयारी भी शुरू कर दी है। जापान ने अपनी कंपनियों को चीन से बाहर निकालने में मदद करने के लिए 2.2 अरब डॉलर की राशि देने का एलान किया है। वहीं यूरोपीय संघ के सदस्य भी चीन की आपूर्तिकर्ताओं पर अपनी निर्भरता कम करने की योजना पर काम कर रहे हैं।

चूंकि लाॅकडाउन के कारण भारत में आर्थिक गतिविधियां बंद है, जिसका असर अर्थव्यवस्था पर साफ देखा जा सकता है। भारत की अर्थव्यवस्था नाजुक दौर से गुजर रही है। ऐसे में यदि कंपनियां भारत में आकर निवेश करती हैं तो भारत की अर्थव्यवस्था को बूस्ट मिलेगा।  साथ ही रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।

पिछले दिनों प्रधानमंत्री मोदी ने भारत में विदेशी निवेश को आकर्षित करने के साथ ही स्थानीय निवेश को बढ़ावा देने व अर्थव्यवस्था को मजबूती देने की रणनीतियों पर चर्चा के लिए एक बैठक भी आयोजित की थी। बैठक के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि, निवेशकों को केंद्र व राज्य स्तर पर किसी प्रकार की मंजूरी मिलने में देरी व कोई समस्या न हो इसका ध्यान रखा जाए। इससे देश में निवेश करने वाली कंपिनयों को फायदा होगा और उन्‍हें जल्‍द से जल्‍द काम शुरू करने में मदद मिलेगी।

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