आयुर्वेद दिलाएगा दुनिया को कोरोना से मुक्ति! भारतीय वैज्ञानिक जल्द सुनाने वाले हैं खुशखबरी!

नई दिल्ली। कोरोना के इलाज के लिए आयुर्वेद में भी व्यापक स्तर पर संभावनाएं खोजी जा रही हैं। आयुष विभाग ने क्लीनिकल ट्रायल शुरू कर दिया है। जल्द ही इसके नतीजे सामने आ सकते हैं।

पूरी दुनिया कोरा के कहर से कराह रही है। लाखों जिंदगियों को कोरोना लील चुका है और हजारों लोग अभी भी जिंदगी और मौत से जूझ रहे हैं। जैसे जैसे समय बीतता जा रहा है चीन से निकला ये वायरस दुनिया को और ज्यादा दर्द देता जा रहा है ।पूरी दुनिया के वैज्ञानिक कोरोना की दवा खोजने में लगे हैं। इस बीच आयुर्वेद में भी कोरोना के इलाज की संभवानाएं तलाशी जा रही हैं। केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन के मुताबिक कोरोना के इलाज को लेकर भारत अश्वगंधा समेत कुछ दवाइयों को लेकर व्यापक स्तर पर क्लीनिकल ट्रायल शुरू करने जा रहा है।

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डॉ हर्ष वर्धन के मुताबिक आयुर्वेद में भी कोरोना की दवा की खोज की कोशिश जारी है। आयुष चिकित्सा प्रणाली के क्लीनिकल ट्रायल को लेकर 4 मंत्रालय एक साथ मिलकर काम कर रहे हैं । आयुष मंत्रालय, स्वास्थ्य मंत्रालय और साइंस एंड टेक्नोल़जी विभाग और ICMR मिलकर आयुष चिकित्सा प्राणाली के तहत क्लीनिकल ट्रायल कर रहे हैं । इस परियोजना पर खुद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भी नजर बनाए हुए हैं। डॉ. हर्ष वर्धन के मुताबिक अगर हम ट्रायल में सफल हो जाते हैं तो आयुर्वेद को एक बार फिर से दुनिया के बीच स्थापित करने का बेहतरीन मौका मिल जाएगा। वहीं भारत के इस प्राचीन ज्ञान को लेकर संभावनाओं के नए दरवाजे भी खुल जाएंगे।

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देश में जिस तरह से लोग कोरोना से रिकवर होकर घर पहुंच रहे हैं उसने भी सरकार की उम्मीदों को बढ़ा दिया है। जिस तरह से डॉ. हर्षवर्धन ने कहा कि भारत कोरोना के खिलाफ चल रही लड़ाई में जीत की तरफ बढ़ रहा है। दुनिया में कोरोना से मरने वालों की दर करीब 7 से 8 प्रतिशत है जबकि भारत में  कोरोनोवायरस से होने वाली मृत्यु दर 3.3 प्रतिशत के आसपास बनी हुई है और जबकि ठीक होने वालों का औसत  29.9 प्रतिशत तक पहुंच गई है। नतीजों से उत्साहित भारत सरकार इसे कोरोना के खिलाफ जंग में एक बड़ी सफलता मान रही है।

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पीपीई निर्माण में दूसरे नंबर पर पहुंचा भारत

वहीं भारत ने कोरोना संकट को एक बड़े अवसर के रूप में तब्दील कर दिया है। पीपीई, मास्क और वेंटिलेटर की अपनी जरूरतें पूरी करने को भारत ने ‘मेक इन इंडिया’ के तहत बड़ी छलांग लगाई है। भारत पीपीई निर्माण में चीन के बाद दूसरे स्थान पर पहुंच गया है। अगले छह महीने में भारत चीन को भी पीछे छोड़ सकता है। अगले छह महीने में भारत 250 निर्माताओं के जरिए चीन को पीछे छोड़ देगा। अब हम निर्यात भी करेंगे और एक बड़े वैश्विक किरदार के रूप में उभरेंगे। पूरी दुनिया को पीपीई चाहिए और भारत यह पूरा करेगा।

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