जापान की फौज ने चीनी सैनिकों को खदेड़ा

नई दिल्ली। अपने वायरस के जरिए पिछले कई महीनों से दुनिया में तबाही मचाने का काम करने वाले चीन के मुंह पर एक जोरदार तमाचा उस वक्त लगा जब वह समुंद्र के रास्ते जापानी क्षेत्र में हमला करने का प्रयास कर रहा था। जापानी सैनिकों की बहादुरी देख चीनी सैनिकों को दुम दबाकर भागना पड़ा।

दरअसल पूर्वी चीन सागर में चीनी कोस्ट गार्ड के जहाज जापान के अधिकार वाले दियाओयू द्वीप के पास देखे गए, जिस पर चीन अपना अधिकार जमाता है। इस दौरान चीनी जलपोतो ने एक स्थानीय जापानी फिशिंग बोट का पीछा करना शुरू किया, तो जापानी नौसेना ने तत्काल प्रभाव से पैट्रोलिंग जहाज भेजे और एक रोडियो वार्निंग भेजी। जिसके बाद चीनी जहाजों को ये समझने में देर नहीं लगी कि आगे बढ़ना उसके लिए खतरा हो सकता है और मारे डर के चीनी जहाजों को वापस लौटना पड़ा।

ऐसा पहली बार नहीं हुआ जब चीन ने अपने साम्राज्यवादी मंशूबों को पूरा करने की इस तरह से कोशिश की है। नौसेना अभ्यास के नाम पर चीन के दो मिसाईल फ्रिगेट ताइवान की पूर्व दिशा में शक्ति प्रदर्शन करते दिखाई दिए थे। हाल ही में ताइवान ने यह शिकायत की थी कि चीन ने ताइवान के कुछ मछली पालकों का न सिर्फ अपमान किया बल्कि उनकी vessels को भी निशाना बनाया।

इसी प्रकार चीनी नेवी पिछले कुछ समय से मलेशिया के इलाके में भी घुसपैठ करने की कोशिश कर रही है। चीन की गुंडागर्दी की हद तो तब हो गयी जब कुछ दिनों पहले चीन ने फिलीपींस के अधिकार क्षेत्र में आने वाले हिस्से को अपने हैनान प्रांत का जिला घोषित कर दिया।

यहां ताइवान अकेला नहीं है जिसे बीजिंग की औपनिवेशिक मानसिकता का शिकार होना पड़ा हो। मलेशिया, वियतनाम, यहां तक कि जापान के साथ भी चीन आजकल गुंडई करने पर उतारू है। चीन ने अपनी विस्तारवादी नीति के तहत वियतनाम और ताइवान के इलाकों पर भी कब्जा करना शुरू कर दिया है। हालांकि, वियतनाम ने अब की बार चीन को उसी की भाषा में जवाब देने में देर नहीं लगाई।

दरअसल, चीन ने पारसेल द्वीप को अपना एक जिला घोषित कर दिया। पारसेल को वियतनाम और ताइवान दोनों अपना हिस्सा मानते हैं। चीन के इस कदम पर प्रतिक्रिया देते हुए वियतनाम से इसे “कानूनों का उल्लंघन” बताया। वियतनाम के विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता ले थी थू हांग ने चीन को धमकी देते हुए कहा-

“चीन का यह कदम दोनों देशों की दोस्ती के लिए अच्छा नहीं है। ऐसे कदम वियतनाम की संप्रभुता को ठेस पहुंचाते हैं। उम्मीद है कि चीन ना सिर्फ अपने इस कदम को वापस लेगा बल्कि भविष्य में ऐसे कदम उठाने से भी परहेज करेगा”।

इन सभी घटनाओं का अर्थ साफ है कि चीन अपनी औपनिवेशिक आकांक्षाओं को पूरा करने हेतु किसी भी हद तक जाता है। जापान ही नहीं, बल्कि दक्षिण चीन सागर से सटे देश भी अब चीन के खिलाफ एक स्वर में बोल रहे हैं और चीन पर लगातार कूटनीतिक दबाव बना रहे हैं।

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