कोरोना संकट: संघ के सेवा कार्य को देखकर विरोधी भी चकित, बरखा दत्त भी ‘दांतों तले उंगली दबाने’ को मजबूर

नई दिल्ली। राष्ट्र और समाज सबसे पहले… राष्ट्रीय स्वयं सेवक के लाखों लाख कार्यकर्ता इसी मूल मंत्र को लेकर पिछले 90 सालों से ज्यादा समय सेवा कार्य में जुटे हैं। इसी भावना को लेकर हजारों कार्यकर्ता समाज सेवा के तप में अपने जीवन को होम कर चुके हैं। यही कारण है कि देश जब भी किसी विपत्ति काल से गुजरता है राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के कार्यकर्ता सबसे पहले फ्रंट लाइन पर खड़े नजर आते हैं। आज जब देश कोरोना जैसी महामारी के संकट से जूझ रहा है तब भी आरएसएस के हजारों कार्यकर्ता पिछले दो महीनों से ज्यादा समय से दिन रात सेवा में जुटे हैं। संघ की इस सेवा भावना ने उन लोगों को भी कायल कर दिया है जो कभी सिर्फ उसके निंदा रस में ही डूबे रहते थे।

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कोरोना पर रिपोर्टिंग करने जब पत्रकार बरखा दत्त मुंबई पहुंची तो वहां संघ के लोगों की सेवा भावना ने उनको भी चकित कर दिया है। मुंबई के नेहरू नगर की जिस बस्ती में बरखा दत्त रिपोर्टिंग करने पहुंची थी उसको प्रशासन ने रेड जोन एरिया घोषित कर रखा है लेकिन वहां बड़ी संख्या में आरएसएस के लोग सेवा में जुटे नजर आये। संघ के कार्यकर्ताओं ने नहरू नगर की इस बस्ती में कैंप कर रखा था और लोगों का मेडिकल चेकअप के साथ साथ उनको जरूरी सलाह भी दे रहे थे। आपको बता दें कि बरखा दत्त पत्रकारों की उस जमात का हिस्सा हैं जो संघ की आलोचना में ज्यादा रुचि रखती हैं।

आपको बता दें कि महाराष्ट्र इस वक्त कोरोना प्रभावित राज्यों में पहले स्थान पर है और मुंबई में हालात सबसे ज्यादा खतरनाक हैं। लेकिन इस सबके बावजूद राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के हजारों कार्यकर्ता लोगों की मदद में जुटे हैं।

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आपको बता दें कि 529 जिलों में 30 लाख से अधिक स्वयंसेवक हर स्तर पर राहत पहुंचाने में जुटे हैं। देश के अलग-अलग हिस्सों में वे गरीब और जरूरतमंदों को भोजन खिला रहे हैं, बस्तियों में जाकर मास्क, सेनेटाइजर, दवाइयां एवं अन्य जरूरी सामग्री बांटकर कर लोगों को राहत पहुंचा रहे हैं, जागरूक कर रहे हैं। 22 मार्च से पूर्व संघ की देश भर में 67 हजार से अधिक शाखाएं नित्य प्रतिदिन लगती थीं। एक शाखा के प्रभाव में 20 से 25 हजार की आबादी आती है। प्रत्येक शाखा के प्रभाव में कम से कम 100 से 150 तक प्रशिक्षित स्वयंसेवक होते हैं।

इन स्वयंसेवकों को संकट के समय मदद करने का भी प्रशिक्षण होता है। संघ के अलावा अन्य 36 अनुषांगिक संगठन भी अपने-अपने स्तर पर तय योजना के अनुसार सेवा कार्यों में लगे हैं। कई बस्तियों में 15 दिन के लिए परिवार को कार्यकर्ताओं ने ही गोद ले लिया है। जो विद्यार्थी हॉस्टल अथवा गेस्ट हाउस में फंसे हैं, उनकी व्यवस्था भी स्वयंसेवक कर रहे हैं। किसी परिवार में दवाई की आवश्यकता हो या अस्वस्थता हो तो भी उस समय पूर्ण रूप से उनको हर चिकित्सीय सुविधा प्रदान कराई जा रही है।

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