चीन पर सख्त हुआ अमेरिका, राष्ट्रपति ट्रंप ने किए कई ऐलान

नई दिल्ली। अमेरिका ने चीन को लेकर एक के बाद एक कई सख्त फैसले लिए हैं। अमेरिका ने कोरोना वायरस के फैलने के बाद से ही चीन के खिलाफ सख्त रुख अपनाया हुआ है। अमेरिका राष्ट्रपति ट्रंप चीन को इस वायरस के दुनिया में फैलने के लिए सीधा जिम्मेदार मानते हैं। साथ ही इस पूरे प्रकरण पर WHO की भूमिका पर भी संदेह जताते हैं। अब अमेरिका ने चीन के खिलाफ अपने सख्त रुख को फैसलों में बदलना शुरू कर दिया है। अमेरिका ने चीन के विरुद्ध ताबड़तोड़ फैसले लिए हैं। ट्रंप ने शुक्रवार को ऐलान किया कि, वे WHO से संबंध खत्म करने के साथ ही कोरोना महामारी मामले में चीन के धोखा देने और हांगकांग मामले में उसकी नीतियों के खिलाफ पाबंदिया कई  लगा रहे हैं।

हांगकांग के खिलाफ चीनी सरकार ने नुकसान पहुंचाने वाले फैसले लिए हैं

अमेरिका ने ऐलान किया है कि हांगकांग का विशेष दर्जा भी वापस लिया जाएगा। अमेरिका ने चीन पर हांगकांग की स्वायत्तता का हनन करने का आरोप लगाया और कहा कि अब इसे चीन से स्वायत्त नहीं कहा जा सकता है। ट्रम्प ने कहा, ”चीन की सरकार ने हांगकांग के सम्मान को नुकसान पहुंचाने वाले फैसले लिए हैं। यह हांगकांग, चीन के लोगों और वास्तव में दुनिया के लोगों के लिए एक त्रासदी है। ट्रंप ने यह टिप्पणी चीन की विधायिका द्वारा हांगकांग की स्वायत्तता को कम करने के उद्देश्य से राष्ट्रीय सुरक्षा कानून को मंजूरी देने के एक दिन बाद की। सन् 1997 से हांगकांग में एक देश, दो प्रणाली फामूर्ला रहा है। लेकिन अब चीन एक देश, दो सिस्टम के वादे से मुकर गया है।  वहां अब एक देश, एक सिस्टम है। इसलिए अमेरिका हांगकांग को लेकर अपनी नीतियों में बदलाव करेगा। उन्होंने कहा, इसलिए, मैं अपने प्रशासन को निर्देश दे रहा हूं कि वह हांगकांग को अलग और विशेष तरजीह देने वाली नीतिगत छूटों को खत्म करने की प्रक्रिया शुरू करे।

दरअसल चीन की संसद में नेशनल पीपुल्स कॉन्ग्रेस ने हांगकांग पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। जिसके बाद से हांगकांग में इसको लेकर जबरर्दस्त विरोध प्रदर्शन हो रहा है। इस नए कानून के लागू हो जाने से हांगकांग अपनी स्वायतत्ता खो सकता है और हांगकांग का विशेष दर्जा खत्म हो जाएगा।

चीन के छात्रों पर लगाया प्रतिबंध

इसके साथ ही अमेरिका ने  ऐसे चीनी स्नातक छात्रों के वीजा को निलंबित करने का भी ऐलान किया है, जो उनकी सरकार की नजर में संदेहास्पद शोध में शामिल हैं। जिसके तहत राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पीपुल्स लिबरेशन आर्मी से संबंध रखने वाले चीन के छात्रों और शोधकर्ताओं के देश में प्रवेश पर रोक लगाने की घोषणा की है। उन्होंने कहा कि, अमेरिका से इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी राइट्स और टेक्नोलॉजी हासिल करने के लिए स्नातक छात्रों का इस्तेमाल करने की चीन की कोशिशों को खत्म करने के लिए यह कदम उठाया है।

अमेरिका ने WHO से हटने किया ऐलान

कोरोना संकट को लेकर लगातार विश्व स्वास्थ्य संगठन हमलावर रहे अमेरिका ने अब WHO से हटने का ऐलान किया है। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि संगठन पूरी तरह से चीन परस्त है। राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि चीन WHO को प्रति वर्ष केवल 40 मिलियन डॉलर देता है , जबकि अमेरिका संस्था को 450 मिलियन डॉलर का अनुदान देता है। अमेरिका की तरफ से WHO में सुधार को लेकर जो सिफारिशें की गईं थी, उन्हें संस्था ने पूरा नहीं किया। इससे राष्ट्रपति ट्रंप ने नाराज होकर अलग होने का फैसला कर लिया।

ट्रम्प ने एक बार फिर कोरोना वायरस को लेकर चीन पर गुस्सा जाहिर किया, चीन को वुहान वायरस करार देते हुए ट्रंप ने कहा, ‘चीन ने वुहान वायरस को छिपाकर कोरोना को पूरी दुनिया में फैलने दिया। इससे एक वैश्विक महामारी पैदा हुई, जिसने 1 लाख से ज्यादा अमेरिकी नागरिकों की जान ले ली। पूरी दुनिया में लाखों लोगों की इस वायरस से मौत हुई।

 

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