चीन के डिफेंस एक्सपर्ट ने माना दुनिया में सबसे अधिक खतरनाक है भारतीय सेना

नई दिल्ली। भारतीय सेना की बहादुरी का लोहा अब चीन भी सार्वजनिक रूप से मान रहा है। चीनी सेना के एक विशेषज्ञ ने भारतीय सेना की खुलेआम तारीफ करते हुए कहा कि भारत के पास पठार और पर्वतीय इलाकों की बेहतर जानकारी रखने वाली दुनिया की सबसे बड़ी और सर्वाधिक अनुभवी सैन्य टुकड़ी है।

उन्होंने कहा कि यह भारतीय टुकड़ी तिब्बत सीमा पर बेहद जोखिम भरे क्षेत्र में सटीक और सर्वश्रेष्ठ हथियारों से लैस है। चीन के सैन्‍य विशेषज्ञ की ओर से यह तारीफ ऐसे वक्‍त में सामने आई है जब एलएसी पर गतिरोध सुलझता नजर आ रहा है और चीनी सेना भी पीछे हट रही है।

पर्वतीय मामले में भारत नंबर वन

मॉडर्न वेपनरी पत्रिका के वरिष्ठ संपादक हुआंग गुओझी ने चीन के ‘द पेपर डॉट सीएन’ द्वारा मंगलवार को प्रकाशित एक लेख में भारत की तारीफ की। उन्‍होंने लिखा कि मौजूदा वक्‍त में पठार और पर्वतीय सैनिकों के मामले में भारत दुनिया में सबसे बड़ा और अनुभवी देश है। पठार और पर्वतीय दुर्गम इलाकों में भारतीय सेना की ताकत के आगे अमेरिका, रूस या अन्य कोई यूरोपीय शक्ति तक नहीं ठहरती है।

सबसे बड़ी पर्वतीय लड़ाकू सेना

हुआंग गुओझी ने लिखा है कि 12 डिवीजनों के साथ दो लाख से ज्‍यादा सैनिकों वाला भारतीय पर्वतीय बल दुनिया का सबसे बड़ा पर्वतीय लड़ाकू सैन्‍य बल है। सन 1970 के दशक से भारतीय सेना ने पर्वतीय सैनिकों की संख्या में काफी बढ़ोतरी की है। भारतीय सेना की योजना 50 हजार से अधिक सैनिकों वाली पर्वतीय लड़ाकू कोर बनाने की भी है। भारत की पर्वतीय सेना के हर जवान के लिए पर्वतारोहण एक अनिवार्य गुण है यानी भारतीय पर्वतीय बल का हर जवान इसमें माहिर होता है। इस काम के लिए भारत ने बड़ी संख्या में निजी क्षेत्र से पेशेवर पर्वतारोहियों की भर्ती की है।

सबसे ऊंची चोटी पर भारतीय चौकी

सियाचिन में भारतीय सेना की मौजूदगी का हवाला देते हुए चीन के सैन्‍य विशेषज्ञ हुआंग गुओझी ने कहा कि भारतीय सेना ने सियाचिन ग्लेशियर क्षेत्र में पांच हजार मीटर से अधिक ऊंचाई पर सैकड़ों चौकियां बनाई हैं। मौजूदा वक्‍त में वहां छह से सात हजार भारतीय सेना के जवान तैनात हैं। दुनिया की सबसे ऊंची चौकी 6,749 मीटर की ऊंचाई पर मौजूद है। भारतीय सेना विदेशों से खरीदे और स्‍वदेश निर्मित ऐसे अचूक हथियारों से लैस है जो पर्वतीय और ऊंचाई वाले इलाकों में परिचालन के लिए बेहद माकूल हैं।

भारत ने किया भारी खर्च

हुआंग गुओझी ने कहा कि भारतीय सेना ने अपनी क्षमताओं को बढ़ाने के लिए अमेरिका से एम-777, 155-एमएम होवित्जर तोप और चिनूक हेलीकॉप्टर जैसे आधुनिक उपकरण हासिल करने पर भारी खर्च किया है। 155-एमएम होवित्जर तोप दुनिया की सबसे हल्की और खतरनाक तोप है। वहीं चिनूक भारी परिवहन के मुफीद दु‍श्‍मन को मुंहतोड़ जवाब देने वाला हेलीकॉप्टर है। चिनूक तोप सहित भारी हथियारों को उठाकर ले जाने में सक्षम हेलिकॉप्‍टर है। यह बेहद मुश्किल परिस्थितियों में भी उड़ान भरने में सक्षम है।

भारत सरकार ने रक्षा क्षेत्र को दी तरजीह

बीते अप्रैल में समाचार एजेंसी पीटीआइ ने एक रिपोर्ट जारी की थी। इस रिपोर्ट में स्टॉकहोम स्थित थिंक टैंक इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट यानी SIPRI के एक अध्‍ययन का हवाला दिया गया था। रिपोर्ट में कहा गया था कि सैन्‍य साजोसामान पर भारी भरकम खर्च करने वाले देशों में अमेरिका टॉप पर है जबकि दूसरे नंबर पर चीन और उसके बाद भारत का स्‍थान है। यही नहीं ऐसा पहली बार देखा जा रहा है जब भारत और चीन के तौर पर दो एशियाई ताकतें सैन्‍य साजोसामान पर अधिक खर्च करने वाले दुनिया के शीर्ष तीन देशों में शामिल हुई हैं।

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